पुणे
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे परथ पवार एक बार फिर विवादों में हैं। पुणे के मुणधवा इलाके में सरकारी जमीन के सौदे को लेकर उनकी कंपनी अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी (Amedea Enterprises LLP) को अब भारी भरकम जुर्माना देना होगा। विभाग के अनुसार, कंपनी को 42 करोड़ रुपये की दोहरी स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी ताकि जमीन सौदे को रद्द किया जा सके।
मामला उस वक्त तूल पकड़ा जब यह सामने आया कि परथ पवार की कंपनी ने सरकारी स्वामित्व वाली जमीन को खरीदने का सौदा किया था। हालांकि, बाद में अजित पवार ने खुद घोषणा की थी कि उनकी बेटे की फर्म द्वारा की गई बिक्री विलेख रद्द कर दी गई है। अब रजिस्ट्रेशन और स्टांप विभाग के रजिस्ट्रार कार्यालय ने साफ कर दिया है कि पहले दी गई स्टांप ड्यूटी छूट अब लागू नहीं रहेगी।

रजिस्ट्रार कार्यालय ने परथ पवार के चचेरे भाई और कंपनी के पार्टनर दिग्विजय अमरसिंह पाटिल को सूचित किया कि उन्हें पहले वाली 7% स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी। यह छूट पहले इस दावे के आधार पर ली गई थी कि जमीन पर डेटा सेंटर या आईटी पार्क बनाया जाएगा। लेकिन अब रद्दीकरण दस्तावेज़ में यह साफ है कि आईटी पार्क की योजना छोड़ दी गई है, इसलिए छूट मान्य नहीं है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अब सौदे को रद्द करने के लिए अतिरिक्त 7% स्टांप ड्यूटी भी देनी होगी। यानी कुल 14% स्टांप ड्यूटी—करीब 42 करोड़ रुपये—का भुगतान कंपनी को करना पड़ेगा।
स्टांप विभाग के संयुक्त महानिरीक्षक राजेंद्र मुत्थे ने बताया, “जांच में पाया गया कि ऐसे प्रस्ताव पर छूट नहीं दी जा सकती। इसलिए कंपनी को पहले वाली 7% और सौदा रद्द करने के लिए अतिरिक्त 7% स्टांप ड्यूटी देनी होगी।”
विभाग ने कहा कि यदि अमेडिया कंपनी जमीन को मूल मालिक शीतल तेजवानी को वापस देना चाहती है, तो उसे पूरी स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी। यानी सौदा रद्द होने के बाद भी उसे दोबारा रजिस्टर करना पड़ेगा, जिसके लिए लगभग 21 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
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गुरुवार को यह मामला तब सुर्खियों में आया जब करीब 40 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन की बिक्री विलेख पर जांच शुरू हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस जमीन की वास्तविक बाजार कीमत करीब 1800 करोड़ रुपये है।
शिकायत दर्ज होने के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय के इंस्पेक्टर जनरल ने एफआईआर कराई, जिसमें दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी (जो 272 मालिकों की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए प्रतिनिधित्व कर रही थीं) और उप-पंजीयक आर.बी. तारू के खिलाफ धोखाधड़ी और गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। अजित पवार ने कहा था कि उनका बेटा इस बात से अनजान था कि खरीदी गई जमीन राज्य सरकार की थी।
