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मध्य प्रदेश के आदिवासी जिलों में भारत के पहले सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला रखी गई, जिसे स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा दोनों में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल धार और बैतूल जैसे आदिवासी-प्रमुख क्षेत्रों में हुई है और भविष्य में कटनी और पन्ना जैसे अन्य जिलों में भी ऐसे कॉलेज स्थापित किए जाएंगे।
इस मॉडेल के तहत राज्य सरकार ने लगभग 25 एकड़ भूमि कम दर पर उपलब्ध कराई है, जबकि निजी क्षेत्र अकादमिक भवन, क्लीनिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, हॉस्टल, लैब और आवासीय सुविधाओं का निर्माण करेगा। इससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीधे आदिवासी इलाकों तक पहुंचेगी और स्थानीय युवाओं को एमबीबीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्सों का लाभ मिलेगा।

ये नए मेडिकल कॉलेज पहले से मौजूद जिला अस्पतालों के साथ जुड़े रहेंगे और उन्हें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप उन्नत किया जाएगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस अवसर को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह मॉडल मेडिकल शिक्षा के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने के लिए एक आगे देखने वाला दृष्टिकोण दर्शाता है।
यह योजना राज्य में स्वास्थ्य सेवा वितरण के असंतुलन को दूर करने के प्रयास के हिस्से के रूप में देखी जा रही है, जिससे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा के साथ-साथ गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाएं भी सुदृढ़ होंगी। इस पहल के साथ मध्य प्रदेश सरकार देशभर में एक मिसाल कायम कर रही है, जहां आदिवासी जिलों को स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रमुख अवसंरचना प्रोजेक्ट मिल रहे हैं और यह स्थानीय समुदायों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
