द फॉलोअप डेस्क
बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान को लेकर भले ही विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हों, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट रुख के बाद चुनाव आयोग अब इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी में है। जल्द ही आयोग इस अभियान की आधिकारिक घोषणा कर सकता है। संकेत मिल रहे हैं कि इस अभियान की शुरुआत अगले महीने बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और एक अन्य राज्य से की जा सकती है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। आयोग का इरादा है कि अगले 2 वर्षों में देश के सभी राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
इसको लेकर देशभर के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को तैयारी शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, यह अभियान पहले उन राज्यों में चलेगा जहां 2026 में चुनाव होने हैं, इसके बाद 2027 के चुनाव वाले राज्यों में यह अभियान पहुंचेगा। चूंकि मतदाता सूची के सघन पुनरीक्षण के बाद आपत्तियां और दस्तावेजों की जांच का भी प्रावधान होता है, इसलिए अंतिम मतदाता सूची के आने में करीब एक साल का समय लग सकता है।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग का मुख्य फोकस उन मतदाताओं पर है जो वर्ष 2004 के बाद मतदाता सूची में शामिल हुए हैं। आयोग मानता है कि पिछले सघन पुनरीक्षण अभियान वर्ष 2002 से 2004 के बीच किया गया था। उसके बाद दिल्ली में 2008 और उत्तराखंड में 2006 में यह प्रक्रिया हुई थी। बिहार की तरह देश के अन्य राज्यों में भी आयोग 2004 के बाद मतदाता सूची में जुड़ने वालों से दस्तावेजों की मांग करेगा। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के चलते आयोग का मानना है कि अब यह प्रक्रिया ज्यादा सुगम हो सकेगी।
