द फॉलोअप डेस्क
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आगामी 7 अगस्त को अपने दिल्ली स्थित आवास पर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की एक डिनर मीटिंग की मेज़बानी करेंगे। यह बैठक जून 2024 के बाद विपक्षी गठबंधन की पहली प्रत्यक्ष मुलाक़ात होगी, जिसका उद्देश्य चुनाव आयोग की ओर से शुरू किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध को साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ाना है।
बैठक के अगले दिन, 8 अगस्त को सभी विपक्षी नेता चुनाव आयोग मुख्यालय तक एकजुट विरोध मार्च करेंगे। विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए खासकर बिहार में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं, जिसे उन्होंने “वोट-बंदी”, “वोट-चोरी” और अब “साइलेंट इनविज़िबल रिगिंग (SIR)” का नाम दिया है।

इसी बीच, सरकार ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर अस्पष्टता का रुख अपनाया है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार को पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी संवैधानिक संस्था जैसे चुनाव आयोग के कार्य-कलापों पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम निर्णय लोकसभा और राज्यसभा के पीठासीन अधिकारियों का होगा।
सरकार की इस टालमटोल के बीच विपक्ष ने साफ कहा है कि जब तक SIR पर संसद में बहस नहीं होती, मानसून सत्र पूरी तरह ठप रह सकता है। विपक्षी दल संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह विरोध प्रदर्शन जारी रखने के मूड में हैं।
टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने रविवार को तीखा हमला करते हुए कहा, “भाजपा बिहार में चल रहे SIR यानी 'साइलेंट इनविज़िबल रिगिंग' पर चर्चा से डर रही है। हम shaky मोदी गठबंधन को संसद की प्रक्रिया पर मुफ्त ट्यूटोरियल देंगे, ताकि उन्हें बताया जा सके कि इस मुद्दे पर चर्चा कैसे की जा सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “4 अगस्त से विपक्ष संसद में नियमों के अनुसार सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। भाजपा खुद ही व्यवधान पैदा कर रही है, क्योंकि वे इस चर्चा से बचना चाहते हैं।”
इस पूरे घटनाक्रम में राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रही इंडिया ब्लॉक की बैठक न सिर्फ राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि यह विपक्ष की एकजुटता का भी प्रतीक बनती दिख रही है। साथ ही, यह बैठक आने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव और आगामी सत्रों की रणनीति तय करने में भी एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
