द फॉलोअप डेस्क, रांची:
खान एवं भूतत्व विभाग ने लघु खनिज समुदान नियमावली में संशोधन किया है। इस संशोधन के बाद सरकारी कार्य में उपयोग होने वाले लघु खनिजों (मिट्टी-मोरम) के वैध चालान नहीं रहने पर जुर्माने की राशि पहले से कई गुणा बढ़ा दी गयी है। पूर्व में सरकार वैध चालान नहीं रहने पर केवल तय रॉयल्टी की दोगुणी राशि जुर्माने के रूप में लेकर संवेदकों, ठेकेदारों और विकास के काम करने वाली कंपनियों का भुगतान कर देती थी। बीच में राज्य सरकार ने नियमावली में एक नया संशोधन कर दिया था। उसके अनुसार वैध चालान नहीं रहने पर संवेदकों और ठेकेदारों के भुगतान पर ही रोक लगा दी गयी थी।
नियमावली में संशोधन का किया था आग्रह
इसको लेकर ग्रामीण विकास सहित कई अन्य विभागों ने सरकार से नियमावली को संशोधित करने का आग्रह किया था। नियमावली की संबंधित धारा को पूर्ववत रखने की मांग की थी, जिसमें जुर्माने के रूप में रॉयल्टी की दो गुणी राशि लेकर ठेकेदारों का भुगतान होता था। लेकिन सरकार ने पूर्व में संशोधित नियमावली को शिथिल करने के बदले अब जुर्माने के प्रावधान और कड़ा कर दिया है। नये प्रावधान में ईंट भट्ठा के लिए उपयोग होने वाली मिट्टी पर जुर्माने की रकम रॉयल्टी का 10 गुणा कर दिया गया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने 27 अक्तूबर को संबंधित आदेश जारी कर दिया है। संशोधित आदेश गजट प्रकाशन के साथ प्रभावी हो जाएगी। इस आदेश के प्रभावी होने से विकास कार्यों के विरुद्ध ठेकेदारों और संवेदकों का लंबित भुगतान होना असंभव हो जाएगा। क्योंकि राज्य में लगु खनिज के वैध खादानों की संख्या काफी कम है। इसके अलावा अगर विकास के काम रांची में हो रहे हैं और वैध खादान हजारीबाग में है तो वहां से मिट्टी और मोरम लाना भी मुश्किल होगा। क्योंकि उसकी लागत कई गुणा बढ़ जाएगी।
ईंट मिट्टी पर अब जुर्माने की गणना
यदि कोई व्यक्ति, एजेंट, मैनेजर, कर्मचारी या ठेकेदार बिना किसी वैध अनुमति, अनुज्ञप्ति (License) या चालान के ईंट मिट्टी का उत्खनन, भंडारण या परिवहन करता है, यदि ईंट भट्ठा मालिक या मिट्टी निकालने वाले लोग Royalty की समेकित राशि का पूर्ण भुगतान कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें राजस्व की दर का 10 गुना जुर्माना राशि के रूप में भुगतान करना होगा।
विकास कार्यों में उपयोग होने वाली मिट्टी पर जुर्माने की गणना
विकास कार्यों में उपयोग होने वाले लघु खनिजों के लिए नियम-55 जोड़ा गया है। सरकारी विकास कार्यों में संलग्न सभी कार्य विभाग, संवेदक, ठेकेदार और आपूर्तिकर्त्ता (Suppliers) को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा उपयोग किया गया लघु खनिज वैध खनन पट्टा धारकों या अनुज्ञप्ति धारकों से वैध चालान के माध्यम से क्रय किया गया हो। यदि ऐसा करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें खनिज मूल्य के साथ-साथ तय रॉयल्टी का दोगुना और साथ ही अन्य वैधानिक शुल्क जैसे DMF (जिला खनिज फाउंडेशन), मैनेजमेंट शुल्क, पर्यावरणीय सेस और आयकर के समतुल्य राशि जुर्माने के रूप में खनन शीर्ष में जमा करनी होगी।
जुर्माने की राशि की गणना-(खनिज मूल्य+रायल्टी)x2+DMF+मैनेजमेंट शुल्क+पर्यावरणीय शुल्क+आयकर
