पटना:
Bihar News: बिहार में बाढ़ की स्थिति एक बार फिर गंभीर बनी हुई है, जिससे सियासी घमासान (political tussle) भी तेज हो गया है। इसी बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Jan Suraaj Party founder Prashant Kishor) ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Prime Minister Narendra Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के भाषण सुनकर भाजपा (BJP) के पक्ष में वोट देने भर से बिहार की बाढ़ की समस्या खत्म हो जाएगी? प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के समय नेता बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे, राहत सामग्री बांटेंगे, लेकिन इससे हर साल सामने आने वाली बाढ़ की स्थायी समस्या का समाधान नहीं होगा।
प्रशांत किशोर ने बाढ़ को लेकर बिहार की मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया के एक हिस्से के जरिए लोगों को वास्तविक मुद्दे से भटकाया जा रहा है। उनके मुताबिक, बिहार में बाढ़ आने, राहत और बचाव अभियान चलने तथा राहत के नाम पर होने वाले खर्च के इर्द-गिर्द एक ऐसा चक्र बन गया है, जिसमें बाढ़ के स्थायी समाधान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
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प्रशांत किशोर ने उठाया स्थायी समाधान का मुद्दा
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की बाढ़ का समाधान केवल राहत सामग्री बांटने, नाव चलाने या प्रभावित इलाकों का दौरा करने से नहीं होगा। इसके लिए नदी प्रबंधन, तटबंधों की मजबूती, जल निकासी और नेपाल से आने वाले पानी को लेकर दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नवंबर 2025 के कथित बयान का हवाला देते हुए भी सवाल उठाया कि यदि बाढ़ की समस्या के समाधान को लेकर चुनावी दावे किए जाते हैं, तो जमीन पर इसका स्थायी असर क्यों नहीं दिखाई देता। उन्होंने गुजरात में बाढ़ के दौरान केंद्र की सक्रियता का उदाहरण देते हुए बिहार के लिए भी इसी तरह के दीर्घकालिक हस्तक्षेप की मांग की।
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सितंबर में करीब 50 लाख लोग हुए थे प्रभावित
बिहार में सितंबर 2026 के दौरान आई बाढ़ से करीब 49.72 लाख लोग प्रभावित हुए थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 15 जिलों में बाढ़ का असर पड़ा था। इस दौरान कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ गया था और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता भी दी। 15 सितंबर को 8.27 लाख से अधिक परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए कुल 579.23 करोड़ रुपये भेजे गए। प्रत्येक पात्र परिवार को 7,000 रुपये की सहायता दी गई।
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नेपाल की बारिश से फिर बढ़ा गंडक का खतरा
सितंबर के आखिरी दिनों में नेपाल के गंडक नदी बेसिन में हुई भारी बारिश के बाद उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ गया। 29 सितंबर को वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, छह जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में इसका असर पड़ा। कई स्थानों पर गंडक के तटबंधों में कटाव और टूटने की घटनाएं भी सामने आई हैं। सारण और मुजफ्फरपुर में तटबंध टूटने के बाद निचले इलाकों में पानी फैलने की खबर है। प्रशासन की ओर से प्रभावित पंचायतों में नावें, राहत सामग्री और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने किया बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा
बाढ़ की ताजा स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 सितंबर को उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक भोजन, आश्रय और चिकित्सा सुविधाएं तेजी से पहुंचाने के निर्देश दिए। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से भी बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम बिहार भेजी गई थी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 सितंबर को बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था और केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया था।
राहत बनाम स्थायी समाधान पर फिर बहस
बिहार की मौजूदा बाढ़ ने एक बार फिर तत्काल राहत और दीर्घकालिक समाधान के बीच बहस को सामने ला दिया है। सरकार की ओर से राहत, बचाव और आर्थिक सहायता पर जोर दिया जा रहा है, जबकि प्रशांत किशोर बाढ़ की मूल समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। बिहार में बाढ़ प्रबंधन के सामने नेपाल से आने वाला पानी, नदियों के बदलते प्रवाह, तटबंधों की सुरक्षा, कटाव और जल निकासी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में मौजूदा बाढ़ से राहत के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तटबंधों और नदी प्रबंधन की दीर्घकालिक समीक्षा भी आने वाले समय में अहम मुद्दा रहेगी।