द फॉलोअप डेस्क
छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार की गईं दो केरल की ननों को एनआईए कोर्ट द्वारा जमानत मिल गई है। इसके बाद पूरे देश में राहत और खुशी की लहर दौड़ गई है। इस निर्णय का स्वागत करते हुए कई धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के अध्यक्ष और त्रिशूर के आर्चबिशप मार एंड्रयूज थाझथ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मैं ईश्वर और उन सभी लोगों का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने इस अच्छी खबर के लिए प्रयास किए। दोनों सिस्टर्स अपने माता-पिता की अनुमति से अस्पताल में सेवा के लिए आई थीं। उन्हें चरमपंथी भीड़ ने निशाना बनाया और झूठे आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया। हमारी मांग है कि यह मामला जल्द से जल्द समाप्त किया जाए, क्योंकि देरी से और भी झूठे आरोप लग सकते हैं। ऐसे मामलों से बचाव के लिए सरकार को विशेष कानून लाना चाहिए।"

कोच्चि में सिस्टर प्रीथी मैरी के भाई जोजो एम.वी. ने कहा, "हमें यह खबर सुनकर बेहद खुशी हुई। हमारी पूरी फैमिली की तरफ से धन्यवाद उन सभी को जिन्होंने इस मुश्किल समय में हमारा साथ दिया।"
केरल भाजपा नेता शोन जॉर्ज ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हम शुरुआत से ही कह रहे थे कि यह मामला एक गलतफहमी है। आरोप झूठे थे और आरोपित पक्ष के वकील ने यह साबित किया कि जिन लड़कियों को लेकर मामला था, वे 18 वर्ष से अधिक उम्र की थीं। उनका किसी भी प्रकार के मानव तस्करी या धर्मांतरण से कोई संबंध नहीं था। कोर्ट ने मेरिट के आधार पर जमानत दी है, जो स्वागतयोग्य है।"
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में ईसाई समुदाय पर विभिन्न राज्यों में चरमपंथी समूहों द्वारा हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की सक्रियता की भी सराहना की जा रही है।
