द फॉलोअप डेस्क
ओडिशा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मिली खबरों के अनुसार यहां ONGC की पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग शुरू हो गई है। महानदी ऑफशोर बेसिन में ये शुरुआत की गई है। दूसरे शब्दों में ओडिशा ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। ONGC के इस प्रोजेक्ट को ओडिशा के तट से दूर मौजूद विशाल हाइड्रोकार्बन संभावनाओं की खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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डीपवॉटर ड्रिलिंग के क्या होंगे फायदे
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस महत्वपूर्ण पहल का स्वागत करते हुए कहा कि महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुआ यह अभियान राज्य और देश की ऊर्जा क्षमता को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि उत्कल और कोणार्क क्षेत्रों में मिली उत्साहजनक खोजों के बाद अब यह महत्वाकांक्षी अभियान समुद्र के भीतर मौजूद ऊर्जा संसाधनों की संभावनाओं को और व्यापक स्तर पर तलाशेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीपवॉटर ड्रिलिंग से भूगर्भीय खोज को मजबूती मिलेगी और देश में घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे। इसके साथ ही भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

क्या कहा सीएम माझी ने
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने के संकल्प को मजबूत करती है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ONGC की टीम को ‘समुद्र मंथन’ मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान के साथ ओडिशा भारत के अगले बड़े ऊर्जा क्षेत्र के केंद्र में आ गया है। महानदी ऑफशोर बेसिन में तेल और गैस की संभावनाओं की खोज से न केवल राज्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी नई ताकत मिलेगी।
