रांची
झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 8,111 करोड़ का द्वितीय अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया। अनुपूरक बजट शीत सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को दूसरी पाली में पारित किया गया। इस दौरान विधानसभा में विपक्षी दल बीजेपी के विधायक मौजूद नहीं थे। बजट पेश होने के बाद आजसू के विधायक लंबोदर महतो कटौती प्रस्ताव पेश किया। इस पर दोनों पक्ष के लगभग दर्जनभर विधायकों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने सभी के मंतव्य सुनने के बाद सरकार का पक्ष रखा। बहस के बाद सदन ने अनुपूरक बजट को स्वीकृति दी। इसके बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष
वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि राज्य की 60 फीसदी जनता गरीब है। इस लिहाज से कल्याणकारी योजनाओं पर सरकार को अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की कई विकास योजनाओं में राज्य सरकार की भी भागीदारी होती है। ऐसी योजनाओं में राज्यों को अपने हिस्से की राशि देनी होती है। इसके लिए भी अलग से फंड की जरूरत होती है। कई योजनाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को कर्ज का सहारा लेना पड़ता है। नियम के अनुसार झारखंड सरकार अधिकतम 3 फीसदी कर्ज ले सकती है। कहा, हमने अभी तक 1.25 प्रतिशत ही कर्ज लिया है।

केंद्र नहीं दे रहा झारखंड का बकाया पैसा
बहस के दौरान जेएमएम के गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड सरकार को बकाया राशि नहीं दे रही है। ये राशि लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये है। इस पैसे के लिए बार-बार केंद्र से गुहार लगाई जा रही है। लेकिन केंद्र इसमें पूरी तरह से रुचि नहीं ले रहा है। कहा कि पूरे पैसे मिल जाते तो शायद अनुपूरक बजट की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं, आजसू के विधायक लंबोदर महतो ने सरकार पर आरोप लगाया कि वो बजट की राशि नहीं खर्च पा रही है।
