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जब मुसीबत में फंसती है सरकार तो याद आते हैं अमिताभ कौशल

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द फॉलोअप, रांची
पशुपालन घोटाले की तर्ज पर हुई ट्रेजरी घोटाले को लेकर सरकार चिंतित हो उठी है। क्योंकि बोकारो, हजारीबाग, रांची, रामगढ़ के बाद भी कई अन्य जिलों में ट्रेजरी घोटाले से इंकार नहीं किया जा रहा है। राज्य में हुआ ट्रेजरी घोटाला सरकार के लिए राशि से अधिक सिस्टम को लेकर परेशानी का सबब है। प्रॉपर मॉनिटरिंग की खामी को उजागर करता है। शीर्ष पद पर बैठे अधिकारियों की लापरवाही दर्शाता है। इसके अलावा ट्रेजरी घोटाले को लेकर झारखंड की हो रही बदनामी, सरकार को कुछ ज्यादा ही तनाव दे दिया है। इस परेशानी और बदनामी से बचने के लिए राज्य सरकार को फिर एक अधिकारी याद आया है। उस अधिकारी का नाम अमिताभ कौशल है। झारखंड कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल वर्तमान में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव हैं। इसी लिए राज्य सरकार ने ट्रेजरी घोटाले की जांच के लिए अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में वित्त विभाग के संयुक्त सचिव चंद्रभूषण, ज्योति कुमारी झा, नरेश झा और महालेखाकार कार्यालय के एक अधिकारी को शामिल किया गया है। सरकार को विश्वास है कि अमिताभ कौशल के नेतृत्व में जांच कमेटी दूध का दूध और पानी का पानी करने में सफल होगी।


राज्य सरकार का अमिताभ कौशल के प्रति यह विश्वास अनायास ही नहीं है। उत्पाद विभाग में एक के बाद हो रहे दूसरे घोटाले से जब राज्य सरकार पेशान हो उठी, झारखंड की राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी होने लगी तो झारखंड सरकार को अमिताभ कौशल ही याद आया। अमिताभ कौशल को उत्पाद विभाग के सचिव की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद सबसे पहले घोटाले दर घोटाले की फेहरिश्त रुकी। उनके नेतृत्व में शराब के खुदरा दुकानों की बंदोवस्ती का काम निर्विघ्न पूरा हुआ। किसी भी जिले में दुकानों के आवंटन को लेकर शिकायत नहीं आयी। राज्य की खुदरा शराब दुकानों का बेहतर संचालन प्रारंभ हुआ और जारी है। प्रिंट रेट से अधिक पर शराब बेचने की शिकयातें थमी। और अंतिम परिणाम राजस्व वृद्धि के रूप में सामने आया। मालूम हो कि अब तक झारखंड में शराब की बिक्री से सबसे अधिक 2700 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था। लेकिन वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व की यह राशि लगभग 50 फीसदी से बढ़ कर 4013 करोड़ को पार कर गया।

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