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घूस देने वाला मुकरा तो 'फिनोलफथलीन' ने दिलाई रिश्वतखोर हल्का कर्मचारी को सजा

घूस देने वाला मुकरा तो 'फिनोलफथलीन' ने दिलाई रिश्वतखोर हल्का कर्मचारी को सजा

द फॉलोअप डेस्क, रांची:

Jharkhand News: रिश्वत देने वाला मुकर गया तो केमिकल ने रिश्वतखोर हल्का कर्मचारी को सजा दिला दी। हल्का कर्मचारी भानुप्रताप प्रसाद, 8 अगस्त 2002 को 700 रुपये घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा गया था। रांची सिविल कोर्ट में ACB को भानुप्रताप प्रसाद को सजा दिलाने में कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा, क्योंकि मामले में घूस देने वाला प्रमुख गवाह और सूचक ही मुकर गया था। हालांकि, फॉरेंसिक सबूतों ने हल्का कर्मचारी भानुप्रताप प्रसाद को उसके किए की सजा दिला दी। यह अपने आप में दिलचस्प मामला है, जहां रुपये लेते रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद भी एसीबी को आरोपी को सजा दिलाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। 

जमीन म्यूटेशन के बदले मांगी थी रिश्वत
मामला दरअसल यह है कि भानुप्रताप प्रसाद ने जमीन का म्यूटेशन करने के एवज में रिश्वत मांगी थी। सूचक द्वारा भानुप्रताप प्रसाद को 100-100 रुपये के 7 नोट दिए गये थे। सुनियोजित ट्रैप के तहत एसीबी ने हल्का कर्मचारी को रुपये  लेते रंगेहाथ  पकड़ लिया था। नोटों में फिनोलफथलीन पाउडर लगा था। परीक्षण के दौरान नोटों को सोडियम कार्बोनेट में डाला गया तो उनका रंग गुलाबी हो गया। इन नोटों को सील करके FSL जांच के लिए भेज दिया गया था। कोर्ट में यही भानुप्रताप प्रसाद के खिलाफ अहम सबूत साबित हुआ। 

8 अगस्त 2002 को हुई थी भानु की गिरफ्तारी
मामला 8 अगस्त 2002 का है जब भानुप्रताप प्रसाद के आवासीय कार्यालय में एसीबी ने  छापा मारा था। अधिकारियों ने उसे 700 रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। एसीबी की टीम ने भानु के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में डुबाया तो रंग गुलाबी हो गया। इसे बोतल में सुरक्षित जमा करके जांच के लिए भेज दिया गया  था। नोटों का सीरियल नंबर भी मिल गया था।

भानुप्रताप प्रसाद को रांची सिविल कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। 

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