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मेयर पद : धनबाद में अब झामुमो नेत्री डॉ नीलम मिश्रा का क्या होगा

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द फॉलोअप डेस्क

धनबाद नगर निगम के मेयर पद का चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच रहा है। यहां महागठबंधन और एनडीए के भीतर दिलचस्प उठा-पटक की संभावना दिखने लगी है। इंडिया गठबंधन में जहां यह नजारा प्रत्यक्ष तौर पर दिख रहा है वहीं एनडीए के भीतर इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। सबसे बड़ा सवाल है कि झामुमो केंद्रीय समिति की सदस्य और वरिष्ठ नेत्री डॉ नीलम मिश्रा का क्या होगा। झामुमो की धनबाद जिला कमेटी ने मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में उनके समर्थन की घोषणा की थी। इसमें झामुमो के एक केंद्रीय महासचिव की बड़ी भूमिका बतायी गयी थी। केंद्रीय महासचिव से डॉ नीलम मिश्रा के बेहतर संबंध पार्टी के शीर्ष नेताओं को भी पता है। केंद्रीय महासचिव और जिला कमेटी के समर्थन और आश्वासन के बाद ही नीलम मिश्रा ने सोमवार को मेयर पद के लिए नामांकन भी कर दिया था।

लेकिन बदले राजनीतिक घटनाक्रम में सोमवार को चंद्रशेखर अग्रवाल ने भाजपा छोड़ झामुमो का दामन थाम लिया। झामुमो विधायक और पूर्व मंत्री मथुरा प्रसाद महतो शेखर अग्रवाल को लेकर दुमका पहुंचे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष उन्हें झामुमो की सदस्यता दिलायी। झामुमो की सदस्यता दिलाने के पीछे एक ही उद्देश्य, उन्हें झामुमो समर्थित उम्मीदवार बनना है। वैसे शेखर अग्रवाल पहले ही मेयर पद के लिए नामांकन कर चुके हैं। अब एक ही दल से दो-दो नेताओं के नामांकन करने के बाद मामला फंस गया है। निगाह पर मुख्यमंत्री सह झामुमो अध्यक्ष हेमंत सोरेन पर टिकी है। वैसे जानकार सूत्रों का कहना है कि हेमंत सोरेन नीलम मिश्रा को नामांकन कराए जाने के पीछे के खेल से वाकिफ हैं। इधर धनबाद में इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस में भी भारी मारामारी है। कांग्रेस से उसके दो सीनियर नेताओं ने अब तक नामांकन कर दिया है। उनमें शमशेर आमल और रवि चौधरी प्रमुख हैं। अंतिम दिन कांग्रेस नेता राशिद रजा अंसारी के भी नामांकन करने की उम्मीद है। इस तरह कांग्रेस के भीतर ही आपसी टकराव है।

भाजपा में भीतरघात बनने लगा माहौल

संजीव अग्रवाल को भाजपा का समर्थन मिलने से धनबाद में पार्टी के भीतर भीतरघात का माहौल अभी से बनने लगा है। हालांकि भाजपा के किसी नेता ने अब तक मेयर पद के लिए नामांकन नहीं किया है। 4 फरवरी को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। जानकार बताते हैं कि पार्टी समर्थित उम्मीदवार बनने की होड़ सबसे अधिक भाजपा में ही थी। सांसद ढुलू महतो अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाना चाहते थे तो पूर्व सांसद पीएन सिंह अपने पुत्र को। झरिया विधायक रागिनी सिंह अपने पूर्व विधायक पति संजीव सिंह को चुनाव मैदान में उतारने की कोशिश में लगे थे। लेकिन भाजपा ने इन नेताओं के रिश्तेदारों की जगह संजीव अग्रवाल का समर्थन कर दिया। इससे मेयर पद के चुनाव में इन दिग्गजों का संजीव अग्रवाल को कितना समर्थन और सहयोग मिल सकेगा, इस पर सवाल खड़ा किया जाने लगा है। पार्टी के जानकारों का मानना है कि अगर इन नेताओं का संजीव अग्रवाल को समर्थन नहीं भी मिला तो उनके चुनाव में निष्क्रिय बने रहने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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