जामताड़ा
जामताड़ा जिले के मिहिजाम नगर परिषद क्षेत्र में कानगोई शिव मंदिर और बेसिक स्कूल के पास लाखों की लागत से वाटर वेंडिंग मशीन सफ़ेद हाथी साबित हो रहा है. दो साल पहले इसे राहगीरों, स्थानीय दुकानदारों और स्कूली बच्चों को शुद्ध शीतल जल उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया था. लेकिन आज हकीकत यह है कि 14 लाख की यह मशीन खुद प्यास से सूखी पड़ी है. रख-रखाव के अभाव में यह मशीन अब कबाड़ में तब्दील हो रही है.
जनता का आक्रोश कहा- उद्घाटन के बाद सब भूल गए
स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. राहगीरों का कहना है कि सरकार ने पैसा तो पानी की तरह बहा दिया, लेकिन जनता को पानी नसीब नहीं हुआ. लोगों के मन में कई सवाल है कि क्या इन मशीनों का मकसद सिर्फ उद्घाटन तक सीमित था? भीषण गर्मी की आहट के बावजूद समय रहते इसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? जनता के टैक्स के 14 लाख रुपये की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है?
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खामोश प्रशासन और टूटती उम्मीदें
सड़क से गुजरते लोग आज भी उम्मीद भरी नजरों से उस मशीन की ओर देखते हैं, लेकिन वहां से केवल निराशा हाथ लगती है. नगर परिषद की खामोश तमाशा देखने की नीति ने इस संकट को और गहरा कर दिया है. यह सिर्फ एक मशीन का बंद होना नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक तंत्र की विफलता है जहां योजनाएं कागजों पर तो चमकती हैं, लेकिन धरातल पर दम तोड़ देती हैं. अगर समय रहते प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो इस भीषण गर्मी में राहगीरों की प्यास सिस्टम के प्रति उनके आक्रोश को और भड़काएगी.
