द फॉलोअप, गढ़वा
झारखंड के गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र स्थित कुसमही गांव में वन अधिकार पट्टा की जमीन पर पौधारोपण को लेकर विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दो पक्षों के बीच हुई मारपीट में कई लोग घायल हो गए जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल है जबकि पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार, विवाद सामुदायिक वन पट्टा की जमीन पर पौधारोपण को लेकर हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ग्राम सभा के माध्यम से उक्त भूमि पर महुआ, आम, इमली, कटहल, मुनगा और अमरूद जैसे फलदार पौधों के बीज लगाए थे, जो अब अंकुरित हो चुके हैं। वहीं वन विभाग उसी भूमि पर बांस का पौधारोपण कराना चाहता था।
कैसे हुआ विवाद ?
ग्रामीणों का कहना है कि रविवार को वन विभाग के कर्मी कुछ लोगों के साथ ट्रैक्टरों में बांस के पौधे लेकर गांव पहुंचे और ग्राम सभा की अनुमति के बिना पौधारोपण शुरू कर दिया। आरोप है कि इस दौरान पहले से उगे फलदार पौधों को भी हटाया जाने लगा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

कुदाल समेत अन्य औजारों से हमला
मारपीट में 72 वर्षीय केश्वर परहिया और बिरेन्द्र कोरवा गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा रूबिया देवी और दुर्गा देवी के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। सूचना मिलने पर मेराल थाना प्रभारी विष्णुकांत पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और घायलों को तत्काल गढ़वा सदर अस्पताल भेजा, जहां उनका इलाज चल रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान कुछ लोगों ने कुदाल समेत अन्य औजारों से हमला किया। पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की गई है।

लंबे समय से चल रहा था विवाद
बताया जा रहा है कि कुसमही गांव के आदिम जनजाति कोरवा और परहिया समुदाय के परिवारों को वर्ष 2011 में व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा तथा वर्ष 2025 में सामुदायिक वन अधिकार पट्टा मिला था। इसी जमीन के उपयोग और पौधारोपण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है। गांव में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।