लोहरदगा:
सदर थानाक्षेत्र अंतर्गत हेसल गांव में सड़क को लेकर विवाद गहरा गया है. ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने है. शुक्रवार को विवाद बढ़ता देख दंडाधिकारी की मौजूदगी में सदर थाना पुलिस करीब आधा दर्जन महिलाओं को थाने ले आई, जिससे विवाद और बढ़ गया. महिलाओं को कथित तौर पर जबरन थाने लाने के बाद उग्र ग्रामीण थाना पहुंचे और विरोध जताया. वाकये की सूचना मिलते ही बीजेपी के झारखंड प्रदेश मंत्री मनीर उरांव सदर थाना पहुंचे और पुलिस से महिलाओं को घर भेजने की मांग की.
हेसल में बिना इजाजत सड़क का निर्माण
मामला दरअसल यह है कि हेसल बसारडीह से कल्याण अस्पताल तक जाने के लिए ग्रामीणों ने सड़क के लिए जमीन दी थी, लेकिन कुछ माह से उस सड़क पर बॉक्साइट लदे भारी वाहनों का परिचालन किया जा रहा है. इस वजह से सड़क की स्थिति दयनीय हो गई है. आरोप है कि कंपनी न तो सड़क की मरम्मत कराती है और ना ही रैयतों को जमीन का मुआवजा दिया रहा है. आरोप है कि हाल के दिनों में कंपनी ने सड़क चौड़ीकरण के नाम पर रैयतों की जमीन पर बिना इजाजत लिए सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जिसका विरोध लगातार ग्रामीण कर रहे हैं.
थाना प्रभारी ने मामले में क्या सफाई दी!
रैयत सीमा देवी ने बताया की उनके ससुर ने अस्पताल जाने के लिए आमजनों के हित के लिए 8 फुट का सड़क दिया था लेकिन कुछ माह पूर्व बॉक्साइट डंपिंग यार्ड से बड़े वाहनों का परिचालन किया जा रहा है. हमारी मांग है रैयतों को मुआवजा दिया जाए और उसके बाद ही सड़क का निर्माण किया जाए. महिलाओं ने इस करवाई पर विरोध जताते हुए प्रशासन पर जबरन उन्हें हिरासत में लेने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले पर निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने का मांग की है.
सदर थाना प्रभारी रत्नेश मोहन ठाकुर ने मौखिक रूप से कहा एसडीओ के लिखित आदेश के बाद सड़क को खाली कराने के लिए यह कार्रवाई की गई. महिलाओं को घर भेज दिया जाएगा.