साहिबगंज
साहिबगंज जिला के बोरिया प्रखंड अंतर्गत पुआल गांव में दशकों से पक्की सड़क नहीं है। ग्रामीणों ने बुधवार को कच्ची सड़क पर जमा पानी और कीचड़ में धान रोपकर विरोध जताया। ग्राम प्रधान संग्राम सोरेन के नेतृत्व में मांझी टोला, डिगरा टोला, जाहेर टोला, नीचे टोला और ऊपर टोला के ग्रामीणों ने डुगडुगी बजाते हुए सड़क निर्माण की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है। इससे पैदल चलना और वाहनों का आवागमन मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर डीसी, सांसद, विधायक, बीडीओ और अन्य अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

पिछले विधानसभा चुनाव में किया था वोट बहिष्कार
ग्राम प्रधान संग्राम सोरेन ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा देकर वोट बहिष्कार का निर्णय लिया था। बीडीओ के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने मतदान किया, लेकिन चुनाव के बाद भी सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सड़क निर्माण योजना का शिलापट्ट नहीं लगाया जाता, तब तक ग्रामीण इसी तरह आंदोलन करते रहेंगे।
ग्रामीण सुनील सोरेन ने कहा कि अधिकारियों के आश्वासन के भरोसे कई वर्ष बीत गए, लेकिन सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि हर साल बरसात में ग्रामीण सड़क पर धान रोपकर अपना विरोध दर्ज कराते हैं, फिर भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।

मानसून में मरीजों का अस्पताल पहुंचना मुश्किल
मनुवेल मुर्मू ने बताया कि सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। बरसात के दिनों में बीमार और गर्भवती महिलाओं को खटिया के सहारे कीचड़ भरी सड़क पार कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक ले जाना पड़ता है। सड़क पर लंबे समय तक पानी जमा रहने से संक्रमण और बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है।