पाकुड़:
Pakur News: हिरणपुर प्रखंड के आसंजोला गांव में संचालित रोए एंड रोए माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड (Roy and Roy Stone Mining Private Limited) की खदान और क्रशर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कंपनी पर रोजगार के वादे पूरे नहीं करने, नियमों की अनदेखी कर खनन एवं क्रशर संचालन करने और ग्रामीणों को भयभीत करने के आरोप लगाते हुए सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने जनता दरबार में उपायुक्त को सामूहिक आवेदन सौंपकर खदान और क्रशर की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक संचालन पर रोक लगाने का आग्रह किया।

रोजगार और विकास के वादे पूरे नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक, कंपनी ने काम शुरू करने से पहले पब्लिक हियरिंग के दौरान स्थानीय लोगों को रोजगार और गांव के विकास का भरोसा दिया था। ग्रामीणों ने इसी उम्मीद में कंपनी को सहयोग किया, लेकिन उनका आरोप है कि अब न तो स्थानीय लोगों को अपेक्षित रोजगार मिल रहा है और न ही लोडिंग का निर्धारित भुगतान किया जा रहा है। इसके उलट खदान और क्रशर के संचालन से गांव में प्रदूषण और जमीन संबंधी विवाद बढ़ने की स्थिति पैदा हो गई है।

रातभर क्रशर संचालन से ध्वनि और धूल प्रदूषण की शिकायत
ग्रामीणों ने आवेदन में बताया है कि कंपनी मौजा आसंजोला के प्लॉट संख्या 526, 577पी और 579पी में क्रशर तथा 573, 574, 575, 576 और 577 में पत्थर खदान का संचालन कर रही है। आरोप है कि क्रशर रातभर चलाया जाता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण के कारण ग्रामीणों की नींद और सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। क्रशर से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित पानी का छिड़काव नहीं किए जाने की भी शिकायत की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि धूल घरों और खेतों तक पहुंच रही है, जिससे फसलों और कृषि कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

ग्राम प्रधान पर पत्थर व्यवसायी से मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर पत्थर व्यवसायी के साथ मिलीभगत कर ग्रामीणों के खिलाफ कार्य करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि भोले-भाले लोगों के खिलाफ थाना में केस दर्ज कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। आवेदन में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

भारी ब्लास्टिंग से मकानों और लोगों की सुरक्षा पर चिंता
ग्रामीणों ने खदान में भारी ब्लास्टिंग किए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि ब्लास्टिंग के दौरान आसपास के घरों और जमीन में कंपन महसूस होता है। इससे मकानों, पशुओं और लोगों की सुरक्षा को लेकर आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग की अनुमति, विस्फोटक की मात्रा और सुरक्षा मानकों की जांच कराने की मांग की है।
सरकारी और रैयती जमीन के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
आवेदन में लीज क्षेत्र से बाहर पत्थर गिराने, दूसरे रैयतों की निजी जमीन पर कथित तौर पर बिना सहमति बिजली के पोल लगाने और सरकारी पतित एवं गोचर जमीन पर मिट्टी डालने की शिकायत भी की गई है। ग्रामीणों ने इस मामले में ग्राम प्रधान सुशील मरांडी, मुखिया स्टीफन मुर्मू और पारा शिक्षक कॉर्नेलियस मरांडी की कथित भूमिका की जांच कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि सरकारी और निजी जमीन का इस्तेमाल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।

विरोध करने वालों को धमकी देने और महिलाओं से अनुचित व्यवहार की शिकायत
ग्रामीणों ने कंपनी के पट्टाधारक पर गांव में विवाद का माहौल बनाने और विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमेबाजी के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। आवेदन में जान से मारने की धमकी दिए जाने और महिलाओं के प्रति अनुचित व्यवहार की शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। ग्रामीणों ने इन शिकायतों की पुलिस और महिला पुलिस पदाधिकारी के माध्यम से निष्पक्ष जांच कराने तथा प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार और विकास की उम्मीद में दिया गया सहयोग अब उनके लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। गांव में भय और असुरक्षा का माहौल है। सीताराम मास्की, चुनका किस्को सहित अन्य ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा और खदान एवं क्रशर का संचालन बंद कराने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।
संयुक्त जांच दल गठित कर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने उपायुक्त से जिला स्तरीय संयुक्त जांच दल गठित कर खदान एवं क्रशर का भौतिक निरीक्षण कराने, लीज क्षेत्र का सरकारी अमीन से सीमांकन कराने तथा पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण नियंत्रण, ब्लास्टिंग और सुरक्षा मानकों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही सरकारी गोचर जमीन को अतिक्रमणमुक्त कर पूर्व स्थिति में बहाल करने और निजी जमीन पर लगाए गए बिजली पोल की वैधता की जांच कराने का आग्रह किया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक एहतियातन खनन और क्रशर संचालन पर रोक लगाई जाए। जांच में गंभीर अनियमितता प्रमाणित होने पर खनन पट्टा रद्द करने और क्रशर बंद करने की कार्रवाई की जाए। उप विकास आयुक्त ने ग्रामीणों को भरोसा देते हुए जांच टीम गठित कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।