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वाहन मालिक परेशान, परिवहन विभाग और सरकार इत्मीनान, 2024 के बाद से नहीं मिला किसी यात्री वाहन को परमिट

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द फॉलोअप, रांची
झारखंड देश का शायद पहला ऐसा राज्य है जहां सितंबर 2024 के बाद से किसी भी यात्री वाहन को रोड परमिट नहीं मिला। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) में परमिट के लिए लगभग 100 से अधिक और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारों(RTA) में भी लगभग 500 से अधिक आवेदन लंबित हैं। विभाग और सरकार सोयी हुई है। मालिक वाहन खरीद कर उसके संचालन का इंतजार कर रहे हैं। बिना वाहन संचालित किए, बैंक से लिए लोन का ईएमआई भर रहे हैं। बेवजह आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं। इससे वाहन मालिक बुरी तरह परेशान हैं और परिवहन विभाग तथा सरकार इत्मीनान है।


क्यों नहीं जारी हो रहा परमिट
राज्य में दो तरह के परिवहन प्राधिकार हैं। एक एसटीए और दूसरा आरटीए। एसटीए अंतरराज्यीय यात्री परिवहन के लिए रोड परमिट देने की अनुशंसा करता है। आरटीए राज्य के एक जिले या प्रमंडल से दूसरे जिले या प्रमंडल के लिए परमिट देने की अनुशंसा करता है। इसी आधार पर वाहन संचालकों को रोड परमिट जारी किया जाता है। परिवहन सचिव एसटीए के चेयरमैन होते हैं और परिवहन आयुक्त सदस्य सचिव। इसके अलावा एसटीए में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत दो गैर सरकारी सदस्य भी होते हैं। इसी तरह प्रमंडलीय आयुक्त प्रमंडल स्तर पर गठित आरटीए के चेयरमैन होते हैं। उप परिवहन आयुक्त इसके सदस्य सचिव होते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा आरटीए में दो गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन किया जाता है। अब स्थिति यह है कि नवंबर 2025 में एसटीए और आरटीए के मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया। उसके बाद से इन दोनों परिवहन प्राधिकारों में गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन नहीं हो सका है। गैर सरकारी सदस्यों के मनोनयन के लिए फाइल बढ़ती है और ऊपर जाकर अटक जाती है। दिलचस्प यह है कि एसटी की अंतिम बैठक सितंबर 2024 में हुई थी। अर्थात इस बैठक में लिए गए निर्णय के तहत ही कुछ परमिट जारी हुए थे। उसके बाद से किसी भी यात्री वाहन को नया परमिट जारी नहीं किया गया है।


राजस्व का भारी नुकसान
परिवहन विभाग और सरकार की निष्क्रियता से सरकार को प्रति वर्ष राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। फिर भी सरकार के शीर्ष पर बैठे लोगों को इसकी चिंता नहीं है। तब जबकि सरकार पहले से आर्थिक बोझ से दबी है। विभिन्न योजनाओं के लिए आवश्यक राशि नहीं जुटा पा रही है। यहां उल्लेखनीय है कि पैसे की कमी की वजह से ही झारखंड सरकार की जनहितकारी मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना की राशि तीन महीने पर लाभुकों को दी गयी है। सबसे दुखद पहलू यह है कि वैसे वाहन मालिक जिन्होंने लाखों लाख की राशि खर्च कर परिवहन के लिए यात्री वाहन खरीद रखे हैं, बगैर किसी आमदनी के बैंक का ईएमआई भर रहे हैं। फिर भी उनकी परेशानी से सरकार को इससे कोई लेना-देना नहीं है।

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