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सिमडेगा : केलाघाघ से चिमटीघाट गांव तक की गई पर्यटन रुट ट्रैकिंग, 78 वर्ष बाद गांव में पहुंचे अधिकारी

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द फॉलोअप डेस्क
पर्यटन को सशक्त बनाने और सैलानियों को आकर्षित करने के उद्देश्य से सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा केलाघाघ पर्यटन क्षेत्र में नए ट्रैकिंग रूट की खोज की गई। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए उपायुक्त कंचन सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने आज विशेष ट्रैकिंग कार्यक्रम आयोजित किया। ट्रैकिंग के सहारे जिले का सरकारी अमला आज डैम से घिरे चिमटीघाट पहुँचा। टापूनुमा गांवों में रहने वाले ग्रामीणों के चेहरे उस समय खिल उठे जब उन्हें पता चला कि जिले के आला अधिकारी आज़ादी के बाद पहली बार न सिर्फ उनका हालचाल जानने आए हैं, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मंशा लेकर भी पहुंचे हैं। आज़ादी के 78 वर्ष बाद इन गांवों में डीसी–एसपी जैसे बड़े अधिकारियों का आगमन हुआ है।
इस ट्रैकिंग रूट में केलाघाघ से बड़ा बरपानी पंचायत के चिमटीघाट गांव तक पहुंचने पर ग्रामीणों ने अधिकारियों का पारंपरिक रूप से स्वागत किया और पुष्पगुच्छ भेंट किए। इस दल में पुलिस अधीक्षक एम. अर्शी, वन प्रमंडल पदाधिकारी शशांक शेखर सिंह, परियोजना निदेशक आईटीडीए सरोज तिर्की, अपर समाहर्ता ज्ञानेन्द्र, सिविल सर्जन सुंदर मोहन समद, अनुमंडल पदाधिकारी प्रभात रंजन ज्ञानी, एलआरडीसी अरुणा कुमारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी नरेश रजक, जिला पंचायती राज पदाधिकारी दयानंद कार्जी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पलटू महतो, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुरजमुनि कुमारी, सदर BDO समीर रेनियर खालखो, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी रवि किशोर राम, पशुपालन पदाधिकारी डॉ. किंकर कुमार महतो, जिला शिक्षा पदाधिकारी मिथिलेश केरकेट्टा, जिला शिक्षा अधीक्षक दीपक राम, जिला नियोजन पदाधिकारी आशा मक्सिमा लकड़ा, मत्स्य पदाधिकारी सीमा टोप्पो, कृषि पदाधिकारी माधुरी टोप्पो, डीपीएम-JSLPS शांति मार्डी, कार्यपालक अभियंता—पेयजल मुकेश कुमार, कार्यपालक अभियंता—विद्युत मनीष पूर्ति, सदर अंचल अधिकारी मुमताज सहित विभिन्न विभागों के वरीय अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे।
ट्रैकिंग का मार्ग केलाघाघ डैम परिसर से शुरू होकर बड़ा बरपानी पंचायत के चिमटीघाट गांव तक निर्धारित किया गया, जहां लगभग 15–16 परिवार निवास करते हैं। रास्ते भर पहाड़, घने जंगल, नदी-नाले और डैम के बीच से गुजरता यह मार्ग अधिकारियों को प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव कराता रहा। गांव पहुंचकर उपायुक्त ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और इसे पर्यटन विकास के लिए उपयुक्त स्थल बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसा विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए जिससे ट्रैकिंग करने वाले पर्यटक आसानी से गांव तक पहुंच सकें तथा यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव कर सकें। साथ ही पर्यटकों के ठहरने हेतु स्थानीय स्तर पर सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
गांव पहुंचने पर उपायुक्त ने बुजुर्गों के बीच कंबल वितरण कर उनका हाल-चाल जाना। उन्होंने ग्रामीणों से जीवन-यापन से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत की और उनकी जरूरतों को समझा। उपायुक्त ने कहा कि जिला मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पहाड़ और पगडंडियों के कारण यहां से शहर आना-जाना मुश्किल है और डैम के चलते लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, राशन और अन्य जरूरतों के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को नाव से नदी पार कर चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना अत्यंत कठिन और जोखिमपूर्ण है।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए नए मार्ग की खोज और निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी जाए, ताकि ग्रामीणों के आवागमन में सुगमता आ सके। ट्रैकिंग के दौरान उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, वन प्रमंडल पदाधिकारी सहित अन्य वरीय अधिकारियों ने स्थानीय झुनको टोली द्वारा बनाई गई नाव में नौकायन का अनुभव भी लिया और ग्रामीणों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुना। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जिसमें ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं। केलाघाघ डैम का प्राकृतिक सौंदर्य और गांव की मेहनतकश जिंदगी मिलकर यह दर्शाती है कि स्थायी विकास तभी संभव है जब प्रकृति, संस्कृति और प्रशासनिक संवेदनशीलता एक साथ आगे बढ़ें। सिमडेगा जिला प्रशासन पर्यटन संवर्धन और ग्रामीण विकास को लेकर निरंतर प्रतिबद्ध है।

 

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