द फॉलोअप डेस्क
गुमला जिला मुख्यालय में स्थित भगवान शिव के प्राचीन मंदिर बुढ़वा महादेव मंदिर में कल सावन की शुरुआत से ही शिव भक्तों की काफी भीड़ पहुंचती है। इस मंदिर का अपना इतिहास है। भगवान शिव का शिवलिंग यहां एक पीपल के पेड़ में सैकड़ों वर्ष पहले निकला था। उसी की पूजा लोग आज भी करते हैं। इस मंदिर का अपना एक अलग इतिहास और मान्यता है।
इस मंदिर में पूजा करने के लिए झारखंड के विभिन्न इलाकों के साथ ही साथ बिहार और उड़ीसा से भी लोग आते हैं। इस मंदिर के पुरोहित का मानना है कि इस मंदिर के प्रति आस्था और विश्वास इतना अधिक है कि यहां पर सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी हो जाती है। जिसके बाद लोग आकर मंदिर में भगवान के प्रति अपना भर भी व्यक्त करते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मंदिर में पूजा-पाठ को लेकर आज भी काफी सादगी रखी जाती है, जिसके कारण इस मंदिर के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्व में यह मंदिर एक झोपड़ी में था, लेकिन अब शिव भक्तों के सहयोग से यह मंदिर काफी भव्य बन गया है। आज भी इस पीपल के पेड़ के नीचे भगवान शिव के उसी अवतार की पूजा की जाती है, जो पेड़ को फाड़ते हुए प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास और अधिक देखने को मिलता है।
मंदिर के आसपास प्रकृति की सुंदर वादियों के कारण इसका महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि सालभर इस मंदिर में लोग आकर भगवान की पूजा करते हैं, लेकिन सावन के महीने में इसके प्रति लोगों का आस्था और विश्वास काफी अधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि कल से शुरू होने वाले सावन को लेकर लोग पहले से ही भगवान शिव के इस मंदिर में आकर पूजा-पाठ करने की योजना बना रहे हैं। मंदिर परिसर का हमने जायजा लिया और यहां मौजूद पुरोहित से बातचीत की। उन्होंने इस मंदिर के इतिहास को लेकर अपनी बात रखी और बताया कि यह मंदिर अपने आप में आस्था और विश्वास का प्रतीक है। लोगों की श्रद्धा इस मंदिर के प्रति प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि पूरे सावन में लोग यहां कतार में लगकर भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं और नारियल चढ़ाने के लिए दूर-दराज से आते हैं।
