द फॉलोअप डेस्क
मोरहाबादी स्थित आवास से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुजी के पार्थिव शरीर को लेकर लगभग साढ़े 10 बजे विधानसभा परिसर पहुंचे। यहां पहले से नेता, अधिकारी, विधानसभा कर्मी व सैंकड़ों की संख्या में गुरुजी के समर्थक जमा थे। स्पीकर रबींद्र नाथ महतो के नेतृत्व में पूरी तैयारी की जा चुकी थी। यहां गुरुजी के पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण कर, फूल माला चढ़ा कर, राज्य के लगभग हर बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। राज्य के आलाधिकारियों ने अंतिम अभिवादन किया। उनमें राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, अन्नपूर्णा देवी, संजय सेठ के अलावा प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी व राज्य सरकार के लगभग सभी मंत्री, सांसद व विधायक शामिल हुए। गुरुजी,जो एक ही बार 1985 में जामा से विधायक बने, बावजूद इसके विधानसभा कर्मियों में उनके प्रति अपनत्व व संवेदना का भाव चरम पर था।

विधानसभा में दलीय बैरियर पूरी तरह ध्वस्त था। गुरुजी, मतबल सबके नेता। सबके चहेता। सबके प्रेरणा स्रोत। इसी कारण प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी थे तो उनके ही दल के केंद्रीय नेता जुएल ओराम, संजय सेठ, अन्नपूर्णा देवी भी। भाजपा के लगभग एक दर्जन विधायक,सांसद, पूर्व विधायक भी गुरुजी के दर्शन को बेताब थे। सीपी सिंह, नीरा यादव, रागिनी सिंह, प्रदीप प्रसाद, रामचंद्र चंद्रवंशी सहित भीड़ में न जाने भाजपा के कई अन्य नेता श्रद्धांजलि देने को तत्पर थे। दलीय राजनीति की दीवार यहां पूरी तरह ध्वस्त थी। गुरुजी मतलब झारखंड के एक मात्र निर्दलीय नेता।

शीर्ष अधिकारी भी अंतिम दर्शन के लिए बेताब थे
विधानसभा परिसर में गुरुजी के अंतिम दर्शन और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य के आलाधिकारियों की लंबी लाइन थी। मुख्य सचिव अलका तिवारी, पूर्व मुख्य सचिव डीके तिवारी, वंदना डाडेल, अजय कुमार सिंह, सुनील कुमार, राहुल पुरवार, पूजा सिंघल, अमिताभ कौशल समेत दर्जन भर आईएएस अधिकारी वहां मौजूद थे।

चंपाई सोरेन के आंसु छलक आए
मोरहाबादी स्थित आवास पर भी गुरुजी को कई नेताओं, अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरन गुरुजी को श्रद्धांजलि देते देते भावुक हो उठे। उनके आंसु छलक आए। वहां पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव, आप के राज्य सभा सदस्य संजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओब्रायन समेत दूसरे दलों के दर्जनों नेता और हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी श्रद्धांजलि दी।