द फॉलोअप डेस्क
लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड अंतर्गत चरहु गांव में एक दिव्यांग किसान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यह दावा किया गया कि बैल नहीं होने के कारण किसान अपने बेटों से हल खिंचवा रहा है। वीडियो में यह भी कहा गया कि किसान के बैल वज्रपात से मारे गए हैं। यह दृश्य इतना भावुक था कि खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर संज्ञान लिया और उपायुक्त को निर्देश दिया कि किसान को हर संभव सहायता दी जाए।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद लोहरदगा उपायुक्त डॉ. कुमार ताराचंद स्वयं अधिकारियों की टीम के साथ चरहु गांव पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया। जांच के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने वायरल वीडियो की पूरी कहानी को ही गलत साबित कर दिया।
उपायुक्त की जांच में पाया गया कि किसान लीला उरांव के बैल वज्रपात से नहीं, बल्कि बीमारी से मरे थे। साथ ही खेत में हल नहीं बल्कि पहले से ट्रैक्टर से जुताई हो चुकी थी, और किसान अपने खेत को समतल करने के लिए पट्टा चला रहे थे। वायरल वीडियो में जो दृश्य दिखाया गया, वह दरअसल खेत को समतल करने की प्रक्रिया थी, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
उपायुक्त ने बताया कि यह वीडियो किसी ने मजाक में बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। उन्होंने कहा कि वीडियो पहली नजर में हृदय विदारक लगती है, लेकिन मौके की सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। मामले की गहन जांच की जा रही है और ऐसी झूठी एवं भ्रामक खबरों को फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है। निरीक्षण के दौरान किस्को प्रखंड के बीडीओ भी खेत में ही बेहोश होकर गिर पड़े, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की भ्रामक खबरों से बचने और सोशल मीडिया पर झूठी सूचनाओं को रोकने के लिए सख्ती बरती जाएगी।
