द फॉलोअप, रांची
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में भ्रष्टाचार से जुड़े दो दर्जन से अधिक मामलों को गंभीरता से लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका/पत्र को सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया है। साथ ही शिकायत करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता समीर कुमार सिन्हा की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस को एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट से मिले निर्देश के बाद अपर पुलिस उपायुक्त-1 नई दिल्ली, मंजीत ने तिलक मार्ग थाना प्रभारी के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता समीर कुमार सिन्हा को पत्र लिख कर कहा है कि कानून के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार मृत्यु तक/अनिश्चितकालीन उपवास, भूख हड़ताल, आत्मदाह अथवा आत्महत्या करना गैरकानूनी है। इसलिए आप एसीपी/बी.के. रोड (मोबाइल नंबर: 6828402407) अथवा संबंधित अधिकारी/विभाग से संपर्क कर अपनी शिकायतों का समाधान कराएं। समीर कुमार सिन्हा से पूछने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखने और दिल्ली पुलिस से पत्र प्राप्त होने की बात स्वीकारी।

क्या है पूरा मामला
झारखंड के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता समीर कुमार सिन्हा ने 18 जुलाई 2026 और 4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र लिखा है। उसमें उन्होंने विस्तार से बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड सरकार को भ्रष्टाचार से जुड़े 25 से अधिक मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर अग्रेत्तर कार्रवाई का निर्देश दिया था। लेकिन राज्य सरकार कथित भ्रष्टाचार के मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं की। कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सरकार भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है। सिन्हा ने अपने पत्र में सिरमटोली स्थित डिफेंस की जमीन की खरीद-बिक्री, तत्कालीन डीसी रामनिवास यादव के आवास से कारतूस और पैसा मिलने, तत्कालीन डीजीपी अनुराग सिन्हा पर लगे फेक इनकाउंटर मामले में कार्रवाई करने जैसे विषयों को उठाया गया है। इसके अलावा जेपीएससी-जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, किसी व्यक्ति के निजी कार्यालय में बैठ कर रिटायर आईएएस अधिकारी राजीव अरुण एक्का द्वारा सरकारी फाइल का निबटारा करते पाये जाने का मुद्दा रेखांकित किया गया है। समीर कुमार सिन्हा ने उच्च न्यायालय से जुड़े कुछ मामलों को भी अपने पत्र में उठाया है। साथ ही कहा था कि अगर भ्रष्टाचार से जुड़े इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वह आत्मदाह कर लेंगे। इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और कोर्ट के संबंधित विभाग को अग्रेत्तर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
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