जीतेंद्र कुमार
अमूमन सरकारी कार्यालयों में छुट्टी होती है तो बाबू से लेकर अधिकारी तक प्रसन्न हो उठते हैं। खुशी से झूम उठते हैं। छुट्टी का आनंद लेने के लिए तरह तरह का प्लान बनाते हैं। घूमने चले जाते हैं। लेकिन हर दिन होत न एक समान वाली कहावत राज्य सरकार के कुछ कार्यालयों में चरितार्थ हो रही है। अभी राज्य सरकार के ऐसे सरकारी कार्यालयों में छुट्टी होने पर मायूसी छा जा रही है। ईद और सरहुल की छुट्टी क्या हुई, इन कार्यालयों में काम करने वाले कर्मी परेशान हो उठे। जी हां हम मार्च महीने की बात कर रहे हैं। यह वह महीना है जिसमें वर्क्स डिपार्टमेंट में चारो तरफ पौबारह दिखायी पड़ता है। वर्क्स डिपार्टमेंट ही नहीं राज्य के कोषागारों में कार्यरत कर्मी और अधिकारी भी नहीं चाहते की छुट्टी हो।
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कहीं आवंटन प्राप्त करने के लिए विभागों में मेला लगा है तो उन विभागों के नीचले कार्यालयों में लंबित बिल का पास करा लेने के लिए जमावड़ा। जमावड़े और मेले सा दृश्य सबसे पहले विभागों में दिखायी दे रहा है। उसके बाद कुछ लोग वित्त विभाग में घूमते भी नजर आ रहे हैं। इसमें ठेकेदार, आपूर्तिकर्ता से लेकर कई अन्य तरह के पेशेवर शामिल हैं। वित्त विभाग में ये किसी तरह अपने काम से जुड़े मद में फंड उपलब्ध कराने के लिए दौड़ रहे हैं। फिर विभाग पहुंच कर आवंटन भेजवाने के लिए व्यग्र दिखायी पड़ रहे हैं। जब ये दोनों ही काम सलट गया तो कार्यपालक अभियंताओं के कार्यालय के आगे पेटकुनिया दिए बिल बनवाने के लिए बेचैन दिखते हैं। जब बिल भी बन गया तो भागे भागे ट्रेजरी पहुंच रहे हैं। बिल पास कराने के लिए हाथ पांव जोड़ रहे हैं। हर स्तर पर ये चढ़ावा तो चढ़ाते ही हैं, मांग और पूर्ति के अनुरूप चढ़ावे में प्रसाद की मात्रा भी बढ़ा रहे हैं। जी हां आप समझ गए होंगे, हम मार्च लूट की बात कर रहे हैं।
