द फॉलोअप डेस्क
झारखंड की मिट्टी से निकल आया स्वाद का वो खजाना, जिसका इंतज़ार हर साल होता है। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही जंगल की गोद से बाजार तक पहुंच जाता है ये खास व्यंजन। स्वाद ऐसा कि चिकन-मटन भी इसके आगे फीके पड़ जाएं। और दाम? पूछिए मत, आम सब्जियों से सीधा चार गुना।

द फॉलोअप की टीम जब बाजार ख़बर बनाने पहुंची तब सब्जी बेचने वाले संजय कुमार ने बताया "ये जंगल में सखुआ पेड़ के नीचे मिट्टी के अंदर छिपी रहती है। ऊपर से थोड़ी मिट्टी से ढकी होती है, इसलिए ढूंढना मुश्किल होता है।" इसे लाने के लिए एक घर से 4–5 लोग निकलते हैं, और सुबह 3 बजे से लेकर 8 बजे तक जंगल में मेहनत करनी पड़ती है,सांप, बिच्छू, जहरीले कीड़े और बारिश में बिजली गिरने का खतरा भी बना रहता है। वहीं क्रेता अशोक कुमार बताते हैं कि.."इसमें प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है और इसका स्वाद लाजवाब है। हम लोग साल भर इसका इंतजार करते हैं।"
द फॉलोअप टीम ने जब इस स्वादिष्ट व्यंजन से होने वाले नुकसान की बात जाननी चाही तो डॉक्टर निखिल आनन्द से बात की. उन्होंने बताया "इसमें प्रोटीन जरूर है, लेकिन लोग पैसा बचाने के लिए कहीं से भी खरीद लेते हैं या खुद जंगल से तोड़ लाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। कल ही गिरिडीह में गलत खुखरी खाने से 6-7 बच्चों को फूड पॉइजनिंग हो गया। उनकी हालत गंभीर हो गई है।"उन्होंने आगे साफ कहा "हमेशा किसी जानकार व्यक्ति से ही खरीदें। कच्चे, काले या सड़े हुए फुटका सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।"
लोग कहते है कि मानसून में अगर झारखंड आना हो तो रूगड़ा जरूर चखना, स्वाद भी मिलेगा और कहानी भी। फुटका-रूगड़ा झारखंड की शान है, लेकिन स्वाद के साथ सावधानी भी जरूरी है। सही जगह से खरीदें, सही जानकारी के साथ खाएं।
