द फॉलोअप डेस्क
नगर निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर मामला कोर्ट पहुंचने लगा है। पूर्व में धनबाद नगर निगम के मेयर का पद अनारक्षित करने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। अब कपाली नगर परिषद के अध्यक्ष का पद अनारक्षित किए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। अफशाना परवीन ने इसको लेकर झारखंड हाईकोर्ट में पीआईएल (फाइलिंग नंबर-WPC/423/2026) फाइल की है। इसके अलावा परवीन ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य निर्वाचन आयोग, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव के अलावा ईडी से भी इसकी शिकायत की है। उसमें उन्होंने इस अनियमितता को अविलंब सुधारने की मांग और आग्रह किया है।

अपनी यायिका में अफशाना परवीन ने कहा है कि नौ जनवरी 2026 को नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा राज्य के 20 नगर परिषदों को लेकर आरक्षण अधिसूचित किया गया है। इसमें कपाली नगर परिषद के अध्यक्ष का पद जेनरल कर दिया गया है। जबकि कपाली नगर परिषद के अध्यक्ष का पद ओबीसी-वन के लिए आरक्षित होना चाहिए। क्योंकि 29 अक्तूबर 2025 को नगर विकास विभाग द्वारा ट्रिपल टेस्ट के आधार पर जारी जनसंख्या के आंकड़े के अनुसार कपाली में बीसी-वन की जनसंख्या राज्य में सबसे अधिक 59.75 फीसदी है। लेकिन इसके विपरीत मधुपुर और गोड्डा नगर परिषद को बीसी-वन के लिए आरक्षित किया गया है। जबकि मधुपुर में बीसी-वन की जनसंख्या 56.78 एवं गोड्डा में 53.62 है, जो कपाली से कम है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर किया गया है। और जनसंख्या का यह आंकड़ा राज्य सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा ही अधिसूचित है।
