द फॉलोअप, रांची
ट्रेजरी घोटाले की उच्चस्तरीय जांच के लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनी विशेष कमेटी ने अब तक की जांच में बोकारो ट्रेजरी से हुई अवैध निकासी की जांच लगभग पूरी कर ली है। हालांकि सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपने में अभी 8-10 दिनों का और समय लगेगा। लेकिन अब तक की हुई जांच में घोटाले के सूत्रधारों को रेखांकित कर लिया गया है। उनकी भूमिका या लापरवाही को चिह्नित कर लिया गया है। इस बात की भी जांच पूरी कर ली गयी है कि एकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय किस तरह ट्रेजरी से फर्जी ढंग से वेतन मद में अवैध निकासी करता था। इस निकासी के लिए जांच कमेटी ने डीडीओ सह बोकारो के डीएसपी अनिमेष गुप्ता और कोषागार पदाधिकारी को भी दोषी पाया है।

कैसे करता था कौशल किशोर पांडेय ट्रेजरी से अवैध निकासी
पिछले एक महीने के सघन जांच के क्रम में कमेटी ने कौशल किशोर पांडेय की फर्जीगिरी को ढंग से रेखांकित किया है। जांच में पाया गया है कि कौशल किशोर पांडेय लगभग 20 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के वेतन निकासी का बिल बनाता था, वह दो तरह का होता था। ऑफिस कॉपी में वह केवल उन्हीं पुलिसकर्मियों का नाम, वेतन और राशि को दर्ज करता था। उस ऑफिस कॉपी पर वह डीडीओ सह डीएसपी अनिमेष गुप्ता से हस्ताक्षर करा लेता था। नियमानुसार डीडीओ की स्वीकृति लेने से पूर्व कौशल किशोर पांडेय सीनियर एकाउंटेंट को भी न तो बिल नहीं दिखाता था और ना ही उसकी सहमति।

वहीं ट्रेजरी को भेजे जाने वाले ऑन लाइन बिल में वह उन 20 पुलिसकर्मियों और पदाधिकारियों के बीच पांच फर्जी पुलिसकर्मी का नाम जोड़ देता था। उन रिटायर पुलिसकर्मियों का फर्जी ढंग से टेंपररी आईडी बना लिया था। क्योंकि बिल बनाने के क्रम में एकाउंटेंट को टेंपररी आईडी बनाने का ऑप्शन था। दिलचस्प रूप से इन फर्जी पुलिसकर्मियों का बैंक एकाउंट अपना, पत्नी और रिश्तेदार का डाल देता था। इस कारण ट्रेजरी से वेतन मद में होनेवाली फर्जी निकासी की राशि सीधे कौशल किशोर पांडेय और उनके रिश्तेदारों के एकाउंट में चला जाता था। जांच कमेटी ने यह भी पाया है कि यह काम वह केवल बोकारो में ही नहीं किया। हजारीबाग में भी यही खेल करता था। बोकारो में वह लगभग 5-6 साल और हजारीबाग में लगभग 11 साल तक करोड़ों रुपए की फर्जी निकासी करता रहा। जांच कमेटी ने बोकारो में हुए इस ट्रेजरी घोटाले के लिए डीएसपी और ट्रेजरी अफसर को भी बराबर का जिम्मेदार माना है। क्योंकि इन दोनों अधिकारियों ने आंख मूंद कर वेतन विपत्र पर हस्ताक्षर करते रहे हैं। भले ही यह अनभिज्ञता या लापरवाही हो, लेकिन जांच कमेटी इन दोनों अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किए जाने को रेखांकित किया है। अब जांच कमेटी सरकार को सौंपे जानेवाली रिपोर्ट में इनकी सिलसिलेवार ढंग से जिम्मेदारी को रेखांकित किया जाएगा।

मालूम हो कि बोकारो ट्रेजरी घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडेय और दो पुलिसकर्मियों (ASI और होमगार्ड जवान) समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। बोकारो में लगभग 10 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध निकासी हुई है। इसमें सीआईडी ने अपनी जांच के बाद 1.8 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज कर दिया है।
