द फॉलोअप डेस्क
राज्य के पॉलिटेक्निक संस्थानों के तकनीकी उन्नयन के लिए रखे गए 66 में से 29 कर्मियों की सेवा नियमित होगी। झारखंड हाईकोर्ट द्वारा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सचिव को आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने पर लगाए गए 10 हजार रुपए के जुर्माने के बाद विभाग ने नियमित करने का फैसला किया है। उनके बकाए का भुगतान करने का निर्णय लिया है। जानकारी के अनुसार केंद्र प्रायोजित स्कीम के तहत राज्य के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में विशेषज्ञ, लैब टेक्निनिशियन व थर्ड ग्रेड के विभिन्न पदों पर कुल 66 कर्मियों को नियुक्त कर लिया गया था। केंद्रीय योजना की अवधि समाप्त होने के बाद इन कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी गयी। हालांकि इनमें कई रिटायर भी हो गए थे। राज्य सरकार के फैसले के विरुद्ध नियमितीकरण की मांग को लेकर कई कर्मियों ने झारखंड हाईकोर्ट में अलग अलग याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद वर्षों तक सेवा ली गयी कर्मियों को नियमित करने और अन्य लाभ देने का आदेश दिया। लेकिन इस आदेश का अनुपालन नहीं हुआ।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसी तरह के अन्य मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से पूर्व के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने का कारण पूछा। साथ ही आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने के आरोप में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव को 10 हजार रुपए का जुर्माना भी अधिरोपित कर दिया। सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने उच्चस्तरीय बैठक बुलायी। इसमें महाधिवक्ता, विधि सचिव और संबंधित अधिकारियों को बुलाया गया। उस बैठक में समीक्षा की गयी कि किन कारणों से हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार इस बैठक में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सचिव की लापरवाही को कारण माना गया। इसके बाद विभागीय मंत्री के स्तर पर सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है कि 29 कर्मियों की सेवा नियमित की जाएगी। इसके लिए विभाग को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। उसके बाद कैबिनेट की स्वीकृति लेकर 29 कर्मियों की सेवा नियमित कर दी जाएगी। उनके बकाये और अन्य लाभ का भी भुगतान कर दिया जाएगा।
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