द फॉलोअप डेस्क
झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजेश कुमार की अदालत ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में धनबाद इंस्टीट्युट ऑफ टेक्नॉलॉजी द्वारा दायर मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया है। अदालत ने सीबीआई को दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच का आदेश दिया है। जेयूटी और एआईसीटीई किस तरह छात्रों को ट्रैप कर वसूली कर रहा है। साथ ही छात्रों को ट्रैप कर उसका शोषण करने में इसकी क्या भूमिका है। अदालत ने अपने फैसले सीबीआई को दो सप्ताह में जांच कर अदालत में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) और ऑल इंडिया कॉंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन(एआईसीटीई) को जांच में सहयोग करने का भी आदेश दिया है। हाईकोर्ट इस मामले में अगले तीन फरवरी को सुनवाई करेगा।

दरअसल डीआईटी 2023 से संचालित है। इसे एआईसीटीई से सिविल, मैकेनिकल, माइनिंग और सीएस के लिए 60-60 सीटों एवं इलेक्ट्रिकल स्ट्रीम के लिए 120 सीटों का इंटेक प्राप्त है। इस आधार पर डीआईटी ने इलेक्ट्रिकल में 120 सीटों पर झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के माध्यम से 120 छात्रों का नामांकन कर लिया। लेकिन बाद में जेयूूटी ने 60 छात्रों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं किया। जबकि 17 जनवरी से परीक्षा की तिथि घोषित कर दी गयी। इसको लेकर डाईटी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत ने अपने फैसले में जेयूटी और एआईसीटीई पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की बात भी कही है। कोर्ट ने कहा कि एक बार छात्रों को फंसा कर उसका नामांकन ले लिया जाता है। फिर परीक्षा में शामिल होने नाम पर छात्रों से अवैध वसूली की जाती है। उसे परेशान किया जाता है। कोर्ट ने अपने फैसले में ट्रैफिक पुलिस का उदाहरण भी दिया है। कहा है कि पुलिस जहां नौ इंट्री है, वहां नौ इंट्री का बोर्ड हटा देती है। जब कोई व्यक्ति उस नो इंट्री वाले क्षेत्र में अपना वाहन लगा देता है तो फिर उससे दंड स्वरूप अवैध वसूली करती है। इसी तरह छात्रों का एक बार नामांकन ले लेने के बाद उससे तरह तरह से वसूली की जाती है। उसे प्रताड़ित और परेशान किया जाता है।
