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हजारीबाग : मुठभेड़ में ढेर 1 करोड़ का इनामी नक्सली सहदेव सोरेन के परिवार ने कहा-उन्होंने कभी साथ नहीं दिया

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड पुलिस और कोबरा 209 बटालियन ने बीते कल गोरहर थाना क्षेत्र के पातीपीरी जंगल में हुई मुठभेड़ में तीन नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें से एक झारखंड का कुख्यात नक्सली और भाकपा (माओवादी) केंद्रीय कमेटी का सदस्य सहदेव सोरेन भी शामिल था। सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था। बता दें कि पुलिस ने बताया कि यां तीनों कई बड़ी घटनों को अंजाम दे चुके है और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के बेटे अनूप मरांडी के हत्या में भी यह लोग शामिल थे। 
मुठभेड़ के बाद सहदेव सोरेन का शव हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। अस्पताल के मर्चरी हाउस में सहदेव सोरेन की पत्नी पार्वती देवी, छोटा भाई टेक्लाल सोरेन और दो बेटे शव लेने पहुंचे। इस दौरान उसका बड़ा बेटा मनोज सोरेन और छोटा बेटा भावुक हो गया। बड़ा बेटा मनोज सोरेन ने कहा कि “हमें नहीं पता था कि हमारे पिता नक्सली हैं। जब हम छोटे थे, जब हम छोटे थे, तभी वे हमें छोड़कर चले गए थे,न वे घर आते थे, न ही हमारा उनसे कोई संपर्क था लेकिन असलियत तब पता चली जब पुलिस पापा को खोजने घर आती थी. हमलोगों को कल 12 बजे न्यूज के माध्यम से उनकी मौत के बारे में जानकारी मिली।"
सहदेव सोरेन की पत्नी पार्वती देवी ने कहा, "करीब 10 साल पहले मेरे पति घर छोड़कर नक्सली संगठन में शामिल हो गए थे। उसके बाद न तो वे लौटे और न ही परिवार से कोई खास बातचीत की। हम लोग मजदूरी करके ही परिवार चला रहे थे।" सहदेव सोरेन के छोटे भाई टेक्लाल सोरेन ने बताया, "मेरा भाई कुछ वर्षों पहले घर से निकल गया और नक्सली संगठन से जुड़ गया। उसके बाद वह कभी घर नहीं आया और न ही फोन करता था। लेकिन पुलिस हमेशा घर आकर उसे खोजती रहती थी। पुलिस के अनुसार, हमें जानकारी मिली कि मेरा बड़ा भाई नक्सली संगठन से जुड़कर कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दे रहा था और उस पर सरकार ने एक करोड़ का इनाम भी रखा था।"
बता दें कि सहदेव सोरेन के परिवार में उसकी पत्नी और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा मनोज सोरेन, जो 19 साल का है, रांची में रहकर अपनी 12वीं कक्षा की पढ़ाई करता है। वहीं, छोटा बेटा गांव के सरकारी स्कूल में 8वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा है। पार्वती देवी ने बताया कि पति से कोई संपर्क नहीं होने के कारण वह दूसरों के घर जाकर मजदूरी करती थीं, और उसी मजदूरी से परिवार का खर्च चलता था। जब दोनों बेटे बड़े हुए, तब से वह खुद खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। सहदेव सोरेन के घर की हालत भी बहुत खराब है। एक कुख्यात नक्सली, जिस पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम रखा था, उसका घर एक झोपड़पट्टी था। सिर्फ दो कमरे थे, और वो भी टिन की छत वाले। पार्वती देवी ने कहा, "सहदेव सोरेन ने आज तक अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किया।" सहदेव सोरेन का शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मुठभेड़ से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। सहदेव सोरेन लंबे समय से झारखंड-बिहार सीमावर्ती इलाकों में नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था।



 

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