द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के सिंघरावां स्थित ओवर ब्रिज का गार्ड वाल का एक हिस्सा धंस जाने से इलाके में दहशत और आक्रोश फैल गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस ओवर ब्रिज का अभी पूरी तरह से उपयोग शुरू भी नहीं हुआ था और वह शुरुआती दौर में ही खराब हो गया। इससे निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
करीब दो-तीन माह पहले चालू किए गए इस ओवर ब्रिज में बारिश शुरू होते ही दरारें दिखने लगी थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग को इस बारे में सूचित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब गार्ड वाल का हिस्सा धंसने से यह साफ हो गया है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और नियमों की अनदेखी की गई। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि घटना के कई घंटे बाद तक न तो विभागीय अधिकारी और न ही कंपनी प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, न ही किसी तरह की तकनीकी जांच शुरू की गई। इससे प्रशासनिक उदासीनता और विभाग-ठेकेदार की मिलीभगत के आरोप और मजबूत हो गए हैं। बरही के कांग्रेस नेता दीपक गुप्ता ने कंपनी और एनएचएआई के अधिकारियों पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि राज केशरी कंपनी सरकारी पैसों की डकैती कर रही है, जिसमें एनएचएआई के पीडी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चौपारण क्षेत्र में विकास के नाम पर जनता को ठगा जा रहा है।
वहीं, पूर्व कांग्रेस उपाध्यक्ष और डुमरी निवासी संतोष कुमार रजक ने कहा कि कमीशनखोरी के कारण पुल की गुणवत्ता से समझौता किया गया। नतीजा यह हुआ कि सही ढंग से गाड़ियाँ चलने से पहले ही पुल के पुर्जे हिलने लगे और गार्ड वाल धंस गया। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
