द फॉलोअप डेस्क
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय करों में झारखंड की हिस्सेदारी नहीं दिए जाने पर गंभीर आपत्ति की है। उन्होंने कहा है कि झारखंड को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी क्यों नहीं दी गई, अनुदान की राशि में क्यों कटौती गई इसका केंद्र सरकार अपनी टीम भेज कर जांच करा ले। झारखंड सरकार के अधिकारी भी केंद्र सरकार की टीम का सहयोग करेगी। पूरा साथ देगी। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार इससे ज्यादा और क्या सहयोग कर सकती है। क्योंकि पारदर्शिता के लिए यह जरूरी है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा मंगलवार को सदन में पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर बुधवार को हुई परिचर्चा का जवाब दे रहे थे। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि विपक्ष का कहना है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने के कारण भारत सरकार झारखंड को राशि नहीं दे रही है। केंद्र सरकार में काम करने की इतनी पारदर्शिता है तो एक महीने का झारखंड सरकार समय देती है कि उनके अधिकारी आएं और हमारे अधिकारियों के साथ बैठें और बकाया राशि दे क्योंकि झारखंड ने उपयोगिता प्रमाणपत्र भी दिया था। सिर्फ राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए राशि नहीं दी गई है। भाजपा की सरकार झारखंड में नहीं है, इसलिए केंद्र आर्थिक सहयोग नहीं कर रही है।
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वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विदेश यात्रा का परिणाम दो साल में दिखेगा। निवेशक आएंगे। एक महीने में यह परिणाम नहीं आ सकता है। पूंजी निवेश नहीं होगा तो राज्य को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं। बजट में जो राशि निर्धारित है वह जनता का और जनता के लिए है, सही जगह खर्च होगी। जहां तक 10 हजार करोड़ के हिसाब नहीं मिलने की बात है तो ऐसा नहीं है। सब पता चलेगा और राशि का हिसाब मिल जाएगा। डीएमएफटी फंड की गड़बड़ी की जांच और कार्रवाई होगी। मंत्री ने कहा कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री की घोषणाओं को एक वित्तीय वर्ष में पूरा कराने के लिए कमेटी गठित की जाएगी। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में इस कमेटी में वित्त सचिव समेत प्रमुख विभागों के प्रधान सचिव और सचिव शामिल होंगे। यह कमेटी घोषणाओं का कार्यान्वयन सुनिश्चित कराएगी। उन्होंने कहा सरकार द्वारा की गयी घोषणाओं को पूरा करने के लिए पांच साल का समय जनता से लिया गया है। इसलिए उन घोषणाओं को सरकार अवश्य पूरा करेगी।
झारखंड का वित्तीय प्रबंधन सही नहीं : राज सिन्हा
झारखंड विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा करते हुए भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि राज्य का वित्तीय प्रबंधन जिस तरह ढिंढ़ोरा पीटा जाता है उस तरह नहीं है। 2024-25 के बजट से 2025-26 में कुल 13 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी और इस बार मात्र 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। बजट में वित्तीय प्रबंधन की कमी दिखाई देती है। यह बजट भी परंपरागत बजट रहा है और सिर्फ इसका नाम बदला है। निराशाजनक बजट है और पुरानी योजनाओं को नये रूप में लाया गया है। विजन की कमी है और रोजगार की चर्चा बजट में नहीं है। नौकरी के लिए युवा पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धनबाद में पेयजल योजना की शुरुआत 2018 में की गई और 2022 में पूरा होना था, लेकिन 2026 में भी अभी तक पूरा नहीं हो सका
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प्रतिकूल परिस्थिति में राज्य के विकास का बजट: अनंत प्रताप देव
झामुमो विधायक अनंत प्रताप देव ने कहा कि झारखंड सरकार का बजट गांव, गरीब, किसानों का है। सामाजिक विकास का विशेष दस्तावेज है। 2019 में निर्बाध बिजली शुरू हुई और यह अभी भी जारी है। 22-24 घंटे लोगों को बिजली मिल रही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को नियुक्ति पत्र दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थिति में पेश किया गया बजट झारखंड के विकास को गति देगा।
प्रकृति के संसाधन का नहीं हो रहा उपयोग : डॉ रामेश्वर उरांव
कांग्रेस विधायक डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि बजट से गांव समृद्ध होंगे, महिलाएं सशक्त होंगी, स्वास्थ्य योजना को प्रोत्साहन मिलेगा। पूंजीगत व्यय को बढ़ावा अच्छी बात है। सामाजिक क्षेत्र के लिए यह अच्छा है। झारखंड में प्रकृति ने हमें भरपूर संसाधान दिया है। इसका उपयोग नहीं हो रहा है। यह चुनौती है। यहां आर्थिक विषमता भी है, जिसे दूर करना होगा। राजद के सुरेश पासवान और माले के चंद्रदेव महतो ने भी बजट पर अपनी बात रखी।

आवंटित राशि खर्च होती है या नहीं : सरयू राय
जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि बजट के आंकड़ों के अनुसार राज्य प्रगति कर रहा है। अब देखना है कि जिस मद में राशि आवंटित की गई है उसमें वह खर्च हो पाता है या नहीं। सरकार मइंया समेत जो योजना चला रही है उसका ग्रास रूट पर सर्वे करा ले, ताकि दी जा रही राशि का सदुपयोग हो सके।
अबुआ बजट बबुआ बजट बनकर रह गया : तिवारी महतो
आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो ने कहा कि अबुआ बजट सिर्फ बबुआ बजट बन कर रह गया है। भाजपा और कांग्रेस-झामुमो एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं, लेकिन जनता का काम नहीं हो रहा है। उनके विधानसभा में डीएमएफटी फंड छोड़कर सरकार ने एक भी सड़क नहीं दी है।

रॉ मेटेरियल सप्लायर नहीं मैन्युफेक्चरिंग स्टेट बने झारखंड : जयराम महतो
जेकेएलएम के विधायक जयराम महतो ने कहा कि बजट केवल खर्च का दस्तावेज नहीं आर्थिक बिजन का आइना होना चाहिए। झारखंड का लोहा-कोयला-बॉक्साइड बहारप जाता है और उससे बना समान महंगे दाम में यहां बेचा जता है। झारखंड को रॉ मेटेरियल सप्लायन नहीं मैन्युफेक्चरिंग स्टेट बनना चाहिए।
