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गिरिडीह : फंदे से झूलता मिला व्यवसायी का शव, चार पेज के सुसाईड़ नोट में मिली हैरान करने वाली बातें

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द फॉलोअप डेस्क
गिरिडीह शहर के आईएमएस रोड, कृष्णा अपार्टमेंट निवासी व्यवसायी सुदीप कपिसवे का शव उसके ही कमरे में फंदे से झूलता मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना की सूचना मिलने के बाद जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं नगर थाना पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंचकर मामले की छानबीन में जुट गई है।
घटना के संबंध में बताया गया कि सुदीप तीन-चार दिन पहले ही अपने परिवार को छोड़कर कोलकाता से गिरिडीह आया था। हालांकि, गिरिडीह आने के बाद उसने किसी को यह नहीं बताया कि वह गिरिडीह में है, इसलिए किसी को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। सुदीप का साला उसके अपार्टमेंट के पीछे ही रहता है। आज सुबह जब सुदीप का एक मैसेज उसके परिवार के सदस्य के पास पहुंचा तो सबके होश उड़ गए। परिजन दौड़ते-भागते सुदीप के कमरे में पहुंचे, जहां उसका शव फंदे से झूलता पाया गया। घटना के बाद मृतक सुदीप की पत्नी और बच्चे कोलकाता से गिरिडीह के लिए निकल चुके हैं।
चार पेज का सुसाइड नोट बरामद, कबीर ज्ञान मंदिर से गहरा लगाव
सुदीप ने आत्महत्या करने से पहले एक चार पेज का सुसाइड नोट भी लिखा है। पुलिस और परिजन जब सुदीप के कमरे में पहुंचे तो उसके बेड पर वह सुसाइड नोट रखा हुआ था। मिली जानकारी के अनुसार, सुदीप का गिरिडीह के सिरसिया-सिहोडीह स्थित कबीर ज्ञान मंदिर से गहरा लगाव था। इसलिए उसने जो सुसाइड नोट लिखा है, उसमें "कबीर ज्ञान मंदिर के साहेब जी... साहेब बंदगी" का जिक्र करते हुए यह लिखा, "यह सत्य नहीं है कि आपने हमें दो बार वरदान दिये थे प्रथम वर्ष 2000 में जब मैं समाधि मंदिर के नीचे था, उस समय यह बिल्कुल कच्चा था, अपने हमने प्रसन्न हो का मैं तुम्हारी भक्ति में अति प्रसन्न हूँ, मांगों क्या वरदान चाहिए, पुत्र मांगों पुत्र मिलेगा, धन मांगों धन मिलेगा, जो चाहे माँग लो मिलेगा परन्तु हमने कुछ भी नहीं मांगा, याद है न साहेब जी, दूसरा वरदान आपने वर्ष 2006 में नया हॉल के बेसमेट के सामने उस वक्त दिया था जब उस समय निमाण कार्य चल रहा था। आप‌ने मुझसे कहा, "सुदीप तुमसे हम बहुत प्रमन्न है माँग लो क्या वरदान चाहिए, तुम जरा भी संकोच मत करना भगवान तुमसे अति प्रसन्न है, कल सुबह स्नान करके अपने घर के मंदिर में ' मेरे समक्ष हर महीने कितने धन चाहिए मांग लेना, तब हमने आपसे दस लाख प्रति महीने मांगा था, फिर जब हम आश्रम गए ओर आपकी बंदगी किये आप मुस्कुराकर सिर हिला दिये, साहेब जी, आप अपने आप को गुरु भगवान, अंतरयामी, त्रीकालदर्शी यानी सब कुछ मानते हैं, क्या यह सत्य नहीं कि आपने हमे ये वरदान दिया था। यह सच्च नहीं है कि आपने हमसे कहा था, "तुम अकेले नहीं, सुनील, संतोष, विनय और सुप्रभा तुम्हारा अपना बहन है, खून के रिश्ते से भी मजबुत हैं।" इसके अलावा सुसाइड नोट में कई गंभीर बातें लिखी हैं जो काफी चौंकाने वाली हैं। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है।


 

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