द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा प्रखंड के गोपालपुर पंचायत में स्थित 'प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिर' (स्वास्थ्य केंद्र) की स्थिति ऐसी बनी हुई है जैसे कोई कबाड़खाना, गोदाम या मवेशियों का तबेला हो। लाखों रुपये की लागत से बना यह सरकारी केंद्र आज खुद अपनी बदहाली की आंसू रो रहा है। करीब 5,000 की आबादी वाले इस पंचायत में 70% आबादी आदिवासियों की है। सरकार ने वर्षों पहले सुदूर क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए इस भवन का निर्माण कराया था। लेकिन आज धरातल पर स्थिति बेहद भयावह है। इस तथाकथित अस्पताल में न तो डॉक्टर हैं, न मरीजों के लिए बेड और न ही दवाओं का कोई नामोनिशान। हद तो यह है कि चोरों ने केंद्र के सारे दरवाजे और खिड़कियां तक गायब कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यहां एक ANM नियुक्त हैं, लेकिन वे भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लाचार हैं। चोरी के डर का आलम यह है कि ANM महोदया जब आती हैं, तो बैठने के लिए अपनी कुर्सी खुद साथ लाती हैं और जाने वक्त उसे सुरक्षित रखने के लिए पंचायत भवन में रखकर जाती हैं।

इस पर पंचायत के पूर्व मुखिया मनोज सोरेन ने बताया कि यह केंद्र पूरी तरह अनुमोदित नहीं है। यहां नियुक्त ANM भी सिर्फ प्रभार पर हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री से लेकर जिले के कई वरीय अधिकारियों को पत्र लिखकर गुहार लगाई गई, लेकिन आज तक सिर्फ कोरे आश्वासन ही नसीब हुए। बता दें कि केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को उनके घर के ही नजदीक प्राथमिक उपचार देना, 14 से 63 प्रकार की निःशुल्क जांचें कराना, मातृ-शिशु देखभाल, बीपी-शुगर की स्क्रीनिंग, टेलीकंसल्टेशन और योग जैसी सुविधाएं देना था। लेकिन गोपालपुर में यह योजना महज एक खोखली इमारत बनकर रह गई है। जहां जीवन रक्षक दवाएं मिलनी चाहिए थीं, वहां आज आवारा पशुओं का बसेरा है।