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रघुनाथ महतो की शहादत दिवस पर बोले सुदेश, संकुचित मानसिकता छोड़ें, शहीद की नहीं होती कोई जाति

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द फॉलोअप डेस्क
शहीद रघुनाथ महतो और उनके साथी पुलकु माझी, शाहदेव महतो और गणेश महतो की शहादत 285 साल पहले आज के ही दिन हुई थी। ये एक इतिहास है और इतिहास को इतिहास के तरह जानना चाहिये। उस समय जिन लोगों ने लड़ाई लड़ी। जो लोग जुल्म के खिलाफ उलगुलान लाए, अंग्रेज के 10 हज़ार फौज का सामना किया और तोप-गोलों का जवाब तीर-धनुष से देने का काम किया। इस तरह से ईमानदारी की लड़ाई लड़ी गयी। आज के समय में देखिए… मानसिकता को संकुचित मत कीजिए, क्योंकि शहीद की कोई जाति नहीं होती। ये बातें आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कही। चुआड़ विद्रोह के महानायक‌ रघुनाथ महतो के शहादत दिवस पर लोटा किता (सिल्ली) में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि क्रांतिवीर शहीद रघुनाथ महतो की शौर्य गाथा और वीरता को हृदय में बसाकर इंकलाब जगाना और ललकार की लकीर को बड़ा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हमने हृदय से झारखंड के क्रांतिकारी वीर शहीदों का वंदन स्वीकार किया है और इसे बड़े फलक पर ले जाने के लिए भी तैयार हैं। हम शहादत के सम्मान का रिश्ता हृदय से निभाना जानते हैं। शहीद रघुनाथ महतो स्मारक समिति द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी। मालूम हो कि सामाजिक न्याय कार्यक्रम के तहत आजसू पार्टी ने आज पूरे राज्य में शहीद रघुनाथ महतो की याद में श्रद्धांजलि सभा की।

'जालियावाला संहार' से भी ज्यादा यहां के सपूतों ने किया प्राण न्योछावर
जल, जंगल, जमीन और अस्मिता की हिफाजत को लेकर झारखंडी शहीदों के साहस और शौर्य का एक अविस्मरणीय इतिहास रहा है, लेकिन इतिहास के पन्नों पर इस शौर्य गाथा को उचित और पर्याप्त स्थान नहीं मिला है। सुदेश महतो ने कहा कि जब झारखंडी वीर लड़ाकों के बारे में दिल से जानने और समझने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा कि 'जालियावाला संहार' से भी ज्यादा यहां के वीर सपूतों ने प्राण न्योछावर किए हैं। झारखंड वीर-सपूतों की लड़ाई का मकसद लगभग एक सा रहा- "अपना गांव अपना राज दूर भगाओ अंग्रेजी राज" इसलिए इस श्रद्धांजलि सभा के जरिए हम सभी को संकल्प लेना है।

इस पवित्र धरती पर टपका है लहू
वीर शहीद किसी जाति, किसी समाज के लिए नहीं होता, वह सबके लिए लड़ता है। लोटा में रघुनाथ महतो का लहू टपका है। सुदेश ने कहा कि हमारा फर्ज बनता है कि इस लहू का मर्म और रंग कभी फीका नहीं पडने दें। लोटा किता का यह अखाड़ा अगले साल शहीदों के सम्मान में और विस्तार से सजेगा। रघुनाथ महतो के अलावा डोमन भूमिज, कुलटू माझी, सहदेव महतो, गणेश महतो त्रिभुवन महतो समेत सभी साथियों की वेदी खड़े किए जाएंगे। इनके अलावा झारखंड के हर हिस्से से शहीद होने वाले सपूतों के परिवारों को भी हम खोज कर निकालेंगे। उनका सम्मान करेंगे।

सरकार ने आम आवाम से खो दिया है विश्वास
श्रद्धांजलि सभा में सुदेश ने हेमंत सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लूट की सरकार ने आम आवाम से विश्वास खो दिया है। हर गंभीर मामलों में सरकार के लोग ओछापन दिखाते हैं। राज्य के बुद्धिजीवियों, महिलाओं और खासकर युवाओं को यहां के हालात समझने होंगे। वहीं, सरायकेला नीमड़ी प्रखंड स्थित घोटिया डे गांव से रघुनाथ महतो के कई वंशज भी श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे। सुदेश ने हरेलाल महतो और अन्य अतिथियों ने शॉल ओढ़ाकर उनका स्वागत किया।

सौंदर्यीकरण योजनाओं का हुआ शिलान्यास-उद्घाटन
सुदेश कुमार महतो ने पंचायत प्रतिनिधियों के साथ लोटा पंचायत के ग्राम लोटा (गढ़तेतेर) में पीसीसी एवं शहीद स्थल सौंदर्यीकरण का शिलान्यास किया। शहादत स्थल तोरण द्वार के अलावा ग्राम लोटा के दुर्गा मंदिर में जल नल निर्माण कार्य का उद्घाटन किया। वहीं, गूंज परिवार और शहीद रघुनाथ महतो स्मारक समिति लोटा के द्वारा लगाए गए रक्तदान शिविर में समिति के कई सदस्यों और ग्रामाणों ने रक्तदान किया। वहीं, लोटा किता में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के लिए सिल्ली, मुरी, रामपुर, पतराहातू, सोनाहातू, बारेदा, बुढाम, तमाड़, इचागढ़ से लोगों ने बाइक रैली निकाली। शहीद के सम्मान में लोक कलाकारों ने छऊ, पाइका, झूमर नृत्य और गीत का प्रदर्शन किया।

क्रांतिवीरों की शौर्य गाथा बताई गई
शहादत दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को आजसू पार्टी के गोमिया विधायक डॉक्टर लंबोदर महतो, पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस, उमाकांत रजक, पूर्व सांसद रामटहल चौधरी, जिप अध्यक्ष निर्मला भगत, उपाध्यक्ष वीणा चौधरी के अलावा देवशरण भगत, हरेलाल महतो, तिवारी महतो, डॉ. मुकुंद चंद्र मेहता, डॉ. शशि भूषण महतो, डॉ. राजाराम महतो, डॉ वृंदावन महतो, गुंजल इकीर मुंडा, मंजू सिंह मुंडा, राजेंद्र शाही मुंडा, मानकी सिंह मुंडा, परमेश्वरी सांडिल, सुकरा सिंह मुंडा, रामदुर्लभ सिंह मुंडा ने भी संबोधित किया। सभी ने रघुनाथ के साथ झारखंड के क्रांतिवीरों की शौर्य गाथा को सामाजिक राजनीतिक और ऐतिहासिक पटल पर उचित और पर्याप्त स्थान दिलाने के लिए आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

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