द फॉलोअप डेस्क
14 वीं जेपीएससी की परीक्षा का शिड्युल घोषित कर दिया गया है। 31 जनवरी से इस परीक्षा के तहत 103 अभ्यर्थियों के चयन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 14 फरवरी की शाम पांच बजे तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया जाएगा। 16 फरवरी की शाम पांच बजे तक परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि होगी। लेकिन इस प्रतियोगी परीक्षा में छात्रों को उम्र सीमा में छूट नहीं मिलने से वे आक्रोशित हैं। आंदोलन पर उतारू हैं। जेपीएससी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से मिल कर अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अगर उम्र सीमा में छूट नहीं मिली तो वे आंदोलन की राह पकड़ेंगे। कुछ यही स्थिति कक्षपाल नियुक्ति को लेकर भी है। राज्य में 10 साल बाद कक्षपालों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो रही है, लेकिन इस प्रतियोगी परीक्षा में भी जेएसएससी द्वारा उम्र सीमा में कोई छूट नहीं दी जा रही है।
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क्या है उम्र सीमा का मामला
14 वीं जेपीएससी के लिए निकाले गए विज्ञापन में उम्र सीमा के लिए कट ऑफ डेट अगस्त 2026 तय किया गया है। इस कारण उम्र सीमा में कोई छूट नहीं मिलने से छात्र आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि सातवीं से दसवीं जेपीएससी की परीक्षा में सरकार ने कट ऑफ डेट अगस्त 2016 निर्धारित किया था। उसके बाद 11 वीं से 13 वीं जेपीएससी की परीक्षा में भी कट ऑफ डेट अगस्त 2017 निर्धारित किया गया। अब 14 वीं जेपीएससी की परीक्षा में भी उसी अनुरूप कम से कम पांच साल की उम्र सीमा में छूट मिलनी चाहिए। लेकिन सरकार और जेपीएससी ने छात्रों के हितों का कोई ध्यान नहीं रखा है। उम्र सीमा में दी जा रही छूट को ध्यान में रखते हुए हजारों की संख्या में छात्र इस परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे हैं। अब उम्र सीमा में छूट नहीं मिलने से वे परीक्षा देने से वंचित रह जाएंगे।
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उम्र सीमा में छूट के पीछे का तर्क
अलग झारखंड राज्य का निर्माण वर्ष 2000 में हुआ था। वर्ष 2001 से 2025 तक अगर प्रति वर्ष जेपीएससी की परीक्षाएं होती तो अब तक कम से जेपीएससी की 25 परीक्षाएं हो चुकी रहती है। फिर छात्रों को उम्र सीमा में छूट को लेकर कोई मांग ही नहीं रह जाती। लेकिन पिछले 11 साल में मात्र तीन प्रतियोगी परीक्षाएं हुई। प्रति वर्ष परीक्षा नहीं होने से हजारों छात्र परीक्षा देने से वंचित होते गए। हालांकि पांच साल की उम्र सीमा में छूट देने से कुछ भरपाई हुई। लेकिन इस बार उम्र सीमा में कोई छूट नहीं देने से फिर हजारों छात्र वंचित होंगे।
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