द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
LPG का नया कनेक्शन दिए जाने पर लगे प्रतिबंध से अब आम लोग परेशान होने लगे हैं। छात्रों और अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों की परेशानी कहीं अधिक है। झारखंड में हजारों की संख्या में ऐसे लोग एलपीजी सिलेंडर के लिए भटक रहे हैं। खास कर शहरी इलाकों में ऐसे लोगों की परेशानी कहीं अधिक है। शहरों में रह कर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों का दर्द कुछ ज्यादा ही है। मालूम हो कि 28 फरवरी को मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद केंद्रीय पेट्रॉलियम मंत्रालय ने एलपीजी के नये कनेक्शन जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 5 केजी वाले सिलेंडर का नया कनेक्शन भी प्रतिबंध है। उसके बाद से यह प्रतिबंध जारी है। मध्य पूर्व में युद्ध के निकट भविष्य में समाप्त नहीं होने की संभावना है। इसे देखते हुए एलपीजी को लेकर जारी कठिनाइयों के फिलहाल दूर होने की उम्मीद भी नहीं है। हालांकि इस संबंध में विभिन्न तेल कंपनियों के क्षेत्रीय पदाधिकारियों से पूछने पर वह कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि नये कनेक्शन पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। इसलिए वह कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। सिर्फ इतना भर जानते हैं कि मध्य पूर्व में जंग के कारण एलपीजी का आयात बुरी तरह प्रभावित है। इसी कारण नया कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है।

कई वैध-अवैध कारणों से भी एलपीजी की किल्लत
एलपीजी सिलेंडर को लेकर कई कारणों से आम लोगों और छात्रों को परेशानी हो रही है। पेट्रॉलियम मंत्रालय द्वारा एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए केवाईसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। अब उन्हीं उपभोक्ताओं को सिलेंडर की आपूर्ति हो रही है जिन्होंने केवाईसी करा लिया है। आधिकारिक आंकड़े के अनुसार देश में रजिस्टर्ड एलपीजी उपभोक्ताओं में लगभग 3.86 करोड़ उपभोक्ताओं ने कतिपय कारणों से अपना केवाईसी नहीं कराया है। इनमें कई उपभोक्ताओं की मृत्यु हो गयी है तो कुछ के नाम दो-दो शहरों या स्थान पर गैस कनेक्शन हैं। इस कारण उन्हें सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी गयी है। राजधानी रांची जैसे बड़े शहरों में पाइप लाइन से गैस की आपूर्ति प्रारंभ किए जाने से भी वैसे लोगों को परेशानी होने लगी है जो इधर-उधर से सिलेंडर का जुगाड़ कर लिया करते थे। पेट्रॉलियम मंत्रालय के फैसले के तहत पाइप लाइन से घरेलू गैस की आपूर्ति लेनेवाले उपभोक्ताओं का एलपीजी कनेक्शन को रद्द कर दिया गया है। इसके कारण उनके पास जो एलपीजी सिलेंडर था, उसमें वह गैस नहीं भरवा पा रहे हैं। जबकि पूर्व में वह भरे हुए सिलेंडर को किसी परिचित को देर उसकी जरूरत पूरी कर देते थे। इतना ही नहीं बाजार में अतिरिक्त एलपीजी सिलेंडर की अनुपलब्धता के कारण अस्थायी रूप से शहरों में रहने वाले छात्र, लेबर, कर्मचारी और अन्य लोग छोटे छोटे सिलेंडर में गैस नहीं भरवा पा रहे हैं। जो भरवा पा रहे हैं उन्हें पूर्व की तुलना में दोगुणा, तीन गुणा तक पैसे देने पर रहे हैं।