सिमडेगा:
चाक पर मिट्टी के दीये बनाती ये कोई साधारण महिला नहीं हैं। इनका नाम कंचन सिंह है। ये सिमडेगा की जिलाधिकारी हैं। दरअसल, दीपावली पर्व के मद्देनजर सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह सिमडेगा प्रखंड अंतर्गत तामड़ा पंचायत के कुंबाटोली और बंगरू पंचायत के भेड़ीकुदर गांव पहुंची थीं। उन्होंने गांव में कुम्हारों की ओर से दिवाली को लेकर की जा रही तैयारियों का जायजा लिया। उपायुक्त ने मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के माध्यम से झारखंड माटीकला बोर्ड द्वारा कुम्हारों को उपलब्ध कराई गई विद्युत चाक का अवलोकन किया। केवल इतना ही नहीं। सिमडेगा डीसी कंचन सिंह ने खुद भी जमीन पर बैठकर विद्युत चाक पर मिट्टी के दीये बनाए।
उन्होंने स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी का दीया बनाने की विधि जानी। उसकी बारीकियों को समझा और कई दीये बनाये। डीसी को इस प्रकार मिट्टी के दीये बनाता देख स्थानीय लोग काफी उत्साहित और प्रेरित हुये।

विद्युत चाक का हस्तशिल्पकारों को कितना फायदा!
उपायुक्त ने जाना कि विद्युत चाक के उपयोग से माटी हस्तशिल्पकारों को किस प्रकार अपने कार्य में सुविधा मिल रही है तथा उत्पादन क्षमता और आय में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ रही हैं। उपायुक्त ने यह भी देखा कि पारंपरिक माटीकला के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ रही है। आधुनिक उपकरणों की सहायता से युवा भी इस पारंपरिक कला से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने माटीकला को स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, पारंपरिक कौशल के संरक्षण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

उपायुक्त ने मिट्टी का दीया बनाकर बढ़ाया उत्साह!
इस अवसर पर उपायुक्त सिमडेगा ने स्वयं मिट्टी का दीया बनाकर कुम्हारों का उत्साहवर्धन किया। उनके द्वारा मिट्टी का दीया बनाने की पहल ने माटी हस्तशिल्पकारों के पारंपरिक हुनर के प्रति सम्मान और प्रोत्साहन का संदेश दिया। उन्होंने दीपावली जैसे त्योहारों पर स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित मिट्टी के दीयों एवं अन्य उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
सिमडेगा में 160 से ज्यादा कुम्हारों को मिला विद्युत चाक
उल्लेखनीय है कि सिमडेगा जिले में अब तक 160 से अधिक कुम्हारों को अनुदान के माध्यम से विद्युत चाक उपलब्ध कराया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक माटीकला को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, कारीगरों की कार्यक्षमता बढ़ाना तथा उन्हें स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। विद्युत चाक की सहायता से कुम्हार कम समय में अधिक उत्पाद तैयार कर सकते हैं, जिससे त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलती है।
दीयों की मांग दिवाली में कुम्हारों की आय बढ़ायेगी
दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीयों की मांग कुम्हारों के लिए आय अर्जित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। स्थानीय स्तर पर निर्मित मिट्टी के दीयों को अपनाने से न केवल पारंपरिक कला और संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की आजीविका को भी मजबूती मिलती है। जिला प्रशासन की यह पहल जिले के माटी हस्तशिल्पकारों को प्रोत्साहित करने, पारंपरिक कला को संरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी को इस क्षेत्र में स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।इस भ्रमण में अपर समाहर्ता गिरिजा शंकर महतो सहित अन्य थे।