रांची
JPSC अभ्यर्थियों को आज हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कट-ऑफ तिथि को चैलेंज करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। मिली खबर में बतायाय गया है, अदालत ने अपने फैसले में साफ किया है कि उम्र सीमा तय करना नियोक्ता का नीतिगत अधिकार है, इसमें कोर्ट का दखल जरूरी नहीं लगता। प्रभात खबर में छपी सतीश कुमार की रिपोर्ट में कहा गया है कि अदालत ने JPSC की अलग-अलग परीक्षाओं में आयु सीमा निर्धारण को चैलेंज करने वाली अपीलों को मानने से इनकार कर दिया है। दूसरे शब्दों में इन पर अब सुनवाई नहीं होगा। जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कट-ऑफ तिथि तय करना नियोक्ता (राज्य सरकार) का नीतिगत अधिकार है और न्यायालय इसमें तब तक सुनवाई नहीं कर सकता जब तक कि मामला मनमाना या भेदभावपूर्ण से न जुड़ा हो।

क्या कहा बेंच ने
बहस के दौरान कोर्ट ने कहा कि उम्र सीमा में छूट देना कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक रियायत की भांति है। ये दलील कि पिछली परीक्षाओं में छूट मिली थी, इसे हर बार नहीं माना जा सकता। बहस के दौरान उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि थोक में रिलेक्सेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे अनिश्चितता पैदा होने की संभावना बढ जाती है।

ये है पूरा मामला
गौरतलब है कि इस संबंध में अमित कुमार और अन्य छात्रों ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर झारखंड संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा, विज्ञापन संख्या 05/2026 के लिए निर्धारित एक अगस्त 2022 की आयु सीमा को चैलेंज किया था। इनकी दलील थी कि परीक्षाओं के नियमित अंतराल पर आयोजित न होने के कारण कई योग्य उम्मीदवार अधिक आयु का हो जाने के कारण परीक्षा से वंचित हो जा रहे हैं। उनकी मांग थी कि आयु सीमा की तिथि को बदलकर एक अगस्त 2017 या 2018 कर दिया जाये। लेकिन कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि विज्ञापन झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा नियमावली, 2021 के अनुसार जारी किया गया है। इसमें आयु सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
