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एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतकर लौटीं संजना का लोहरदगा में हुआ भव्य स्वागत, पैरालंपिक है अगला लक्ष्य

एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतकर लौटीं संजना का लोहरदगा में हुआ भव्य स्वागत, पैरालंपिक है अगला लक्ष्य

लोहरदगा:

Jharkhand News: एशियन पैरा गेम्स-2026 (Asian Para Games 2026) में महिला एकल SL-3 पैरा बैडमिंटन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली झारखंड की संजना कुमारी वर्मा (Sanjana Kumari Verma) लोहरदगा लौटीं। शहरवासियों ने संजना कुमारी वर्मा का भव्य स्वागत किया। लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर संजना जैसे ही राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से नीचे उतरीं, लोगों ने गाजे-बाजे, फूल-मालाओं और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। संजना, लोहरदगा की पहली लड़की हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है। 

सरकार से नहीं मिली है आर्थिक सहायता
संजना ने इस कामयाबी को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है। अंतर्राष्ट्रीय पदकधारी संजना ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार की ओर उन्हें आर्थिक सहायता नहीं मिली। खेल के प्रति जुनून और परिवार के सहयोग से उनका सफर आगे बढ़ रहा है। संजना ने जानकारी दी है कि पिता के पेंशन से ट्रेनिंग करती हैं। हालांकि, सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच भी परिवार ने कभी उनका हौसला नहीं टूटने दिया। संजना ने यह भी बताया कि लोहरदगा के पूर्व उपायुक्त कुमार ताराचंद ने हिंडाल्को के सहयोग से चीन जाने के लिए उन्हें हवाई टिकट उपलब्ध कराया था। 

पिता-दादा सेना में दे चुके हैं अपना योगदान
संजना के दादाजी भारतीय सेना में योगदान दे चुके हैं। पिता भी सेवानिवृत्त सैनिक हैं। सैनिक परिवार में पली-बढ़ीं संजना के मन में बचपन से ही देश के प्रति सम्मान और कुछ कर गुजरने का जज्बा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना और तिरंगे का मान बढ़ाना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।

पैरालंपिक पदक जीतना संजना का अगला लक्ष्य
एशियन पैरा गेम्स में जापान की खिलाड़ी के खिलाफ हार का सामना करने के बावजूद संजना निराश नहीं हैं। उनका मानना है कि हार से खिलाड़ी को अपनी कमजोरियों को समझने और बेहतर तैयारी करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि वह अपनी कमियों को दूर कर पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मेहनत जारी रखेंगी। उनका अगला बड़ा सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है। संजना की सफलता उन खिलाड़ियों के लिए भी मिसाल है, जो सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और परिवार का साथ हो तो मुश्किल परिस्थितियां भी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
 

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