द फॉलोअप डेस्क, रांची
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का आज अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर सुबह 9 बजे तक मोरहाबादी स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस दौरान परिजन, झामुमो नेता, पार्टी कार्यकर्ता और शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। अंतिम दर्शन के बाद उनके पार्थिव शरीर के साथ अंतिम यात्रा शुरू होगी। सड़क मार्ग से अंतिम यात्रा मोरहाबादी से ओरमांझी और गोला होते हुए उनके पैतृक गांव नेमरा के लिए रवाना होगी। झामुमो नेताओं के अनुसार, अंतिम यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

बरलंगा घाट पर दोपहर 12 बजे संथाली रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार
रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार नेमरा के बरलंगा गांव स्थित घाट पर दोपहर 12 बजे संथाली रीति-रिवाज से किया जाएगा। इसी घाट पर झामुमो संस्थापक और रूपी सोरेन के पति दिवंगत शिबू सोरेन का भी अंतिम संस्कार हुआ था। इस वजह से बरलंगा घाट परिवार और झामुमो से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने की संभावना है। परिवार और पार्टी की ओर से अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

शिबू सोरेन की सबसे बड़ी ताकत थीं रूपी, बेटे हेमंत के लिए भी बनी रहीं संबल
झारखंड आंदोलन के सबसे कठिन दौर की मूक साक्षी रहीं रूपी सोरेन, शिबू सोरेन की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल थीं। गुरुजी ने 4 अगस्त 2025 को दुनिया को अलविदा कहा था। इसके करीब 14 महीने बाद उनके जीवन के हर उतार-चढ़ाव में छाया की तरह साथ रहने वाली रूपी सोरेन भी बुधवार को अनंत यात्रा पर निकल गईं। शिबू सोरेन के निधन के बाद वह भावनात्मक रूप से बिखर गई थीं और खुद को तन्हा महसूस करने लगी थीं, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा था। पिछले कुछ महीने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए भी बेहद कठिन रहे। एक ओर उनके कंधों पर सत्ता की जिम्मेदारी थी, तो दूसरी ओर उनकी मां अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी से जूझ रही थीं। मां की तबीयत बिगड़ने पर हेमंत सोरेन तुरंत अस्पताल पहुंचते थे। राजनीतिक कार्यक्रमों के बाद भी वह सीधे अस्पताल जाते और देर रात तक आईसीयू के बाहर डॉक्टरों से मां की मेडिकल रिपोर्ट पर चर्चा करते थे। मुख्यमंत्री के चेहरे के पीछे अपनी मां को खोने के डर से जूझता एक बेटा इन पलों में साफ नजर आता था।