द फॉलोअप डेस्क
मनमानी कार्यशैली व खराब व्यवहार के कारण पुलिस अक्सर विवादों में रहती है। मगर कई बार इसका मानवीय चेहरा भी सामने आता है। ऐसा ही मानवीय चेहरा रांची पुलिस का रविवार को सामने आया। रविवार की दोपहर झारखंड हाईकोर्ट के गेट पर कचरा चुनना वाली एक महिला ने अपने 2 मासूम बच्चे को छोड़ कर चली गई थी। दोनों मासूम बच्चे लावारिस स्तिथि में भूखा प्यासा दोपहर से पड़े हुए थे। कुछ लोगों की नजर इस पर पड़ी। भीड़ लगाकर बच्चे के बारे में चर्चा करने लगे। इस बीच चाइल्ड हेल्पलाइन पर कॉल किया गया। पता चला कि अभी इनका काम रांची में नहीं चल रहा है। इसके बाद डोरंडा थाना को सूचना दी गई। सूचना के बाद डोरंडा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। इस बीच कुछ लोगों ने बच्चे को खाने-पीने के लिए सामान दिया।

मां को ढूंढकर लाई पुलिस
पुलिस ने बच्चे की मां के संबंध में पूछताछ की तो पता चला कि चुनने वाली महिला महिला है। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से उसके बारे में पता किया कि उसे किस तरह जाते हुए देखा गया था। इसके बाद डोरंडा थाना के एसआई शिवनाथ रंजन और उनकी टीम ने मासूम बच्चों की मां को डोरंडा मनीटोला कब्रिस्तान के पास से तलाश कर लिया। फिर पुलिस की गाड़ी में ही उसे लेकर गेट के पास आए। जिसके बाद भूखे बच्चों को मां ने दूध पिलाया। करीब एक साल के मासूम के चेहरे पर मां के आंचल में आते ही चेहरे पर मुस्कान आ गई। इधर एक बच्चे के बारे में चर्चा हो रही थी कि वह सुस्त है। शायद उसे लू लगी होगी। इस बात की जानकारी जिला बाल संरक्षण इकाई को दी गई। जिसके बाद जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी वेद प्रकाश ने कहा कि वे अपने स्तर से बच्चे के इलाज व उसे करुणा में रखवाने की पहल शुरू कर दिए हैं।

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