पलामू:
लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद राजहरा कोलियरी में एक बार फिर गतिविधियां शुरू हो गई हैं। आज से यहां कोयला का रोड सेल शुरू किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बन गया। वर्षों बाद ट्रकों की आवाजाही शुरू होने से स्थानीय लोगों में खुशी साफ नजर आई। कोलियरी प्रबंधन ने कुल 60 हजार टन कोयला डिस्पैच के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसमें से करीब 25 हजार टन को स्वीकृति मिल चुकी है। इस पहल को सफल बनाने में परियोजना पदाधिकारी विनोद कुमार दीपक और माइंस मैनेजर एम एम चतुर्वेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और कोल मंत्रालय के सहयोग से संभव हो पाई है।

यूनियन ने बताया नए दौर की शुरुआत
आरसीएमयू के राजहरा एरिया सचिव के एन पांडेय ने इसे क्षेत्र के लिए “नए युग की शुरुआत” बताया। उन्होंने कहा कि जहां लंबे समय से सन्नाटा था, वहां अब फिर से चहल-पहल लौट आई है। हालांकि इस उत्साह के बीच एक बड़ी समस्या भी सामने आई। दिनभर दर्जनों ट्रक अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन स्थानीय समिति द्वारा शुल्क निर्धारण पर सहमति नहीं बनने के कारण कोयला लोडिंग शुरू नहीं हो सकी। देर शाम बातचीत के बाद 2 से 3 ट्रकों में कोयला लोड होने की सूचना मिली।

व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने जताई नाराजगी
डीओ होल्डरों और व्यापारियों का कहना है कि समिति के नाम पर अधिक राशि की मांग की जा रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों ने भी इसे अनुचित बताते हुए कोयला उठाव से इनकार कर दिया है। उनका साफ कहना है कि जब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस विवाद का समाधान नहीं करते, तब तक लोडिंग कार्य सुचारू रूप से शुरू नहीं होगा।