द फॉलोअप डेस्क, रांची:
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संताली भाषा की किताबों का प्रकाशन देवनागरी की जगह ओलचिकि लिपि में कराने की मांग की है। बुधवार को रघुवर दास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में पूरे देश में ओलचिकि लिपि का शताब्दी वर्ष गर्व और उत्साह के साथ मनाया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा विभिन्न पाठ्य-पुस्तकों का निर्माण और प्रकाशन किया जा रहा है। रघुवर दास ने प्रह्लाद जोशी से कहा कि संताली भाषा कि किताबों का प्रकाशन देवनागरी की जगह ओलचिकि लिपि में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शताब्दी वर्ष में ओलचिकि लिपि में अनुवादित भारत के संविधान का लोकार्पण किया था।
आज नई दिल्ली में देश के माननीय शिक्षा मंत्री श्री @joshipralhad जी से मुलाकात कर संताली भाषा की लिपि "ओलचिकी लिपि" में पठन सामग्रियों के प्रकाशन हेतु आग्रह करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
— Raghubar Das (@dasraghubar) September 9, 2026
मैंने मंत्री जी को बताया कि भारत के शिक्षा मंत्रालय के द्वारा विभिन्न पाठ्य पुस्तकों एवं शैक्षणिक… pic.twitter.com/OGSkJpIcEw
8वीं अनुसूची में शामिल है संताली भाषा
रघुवर दास ने बताया कि 30 जून को हूल दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर पर ओलचिकि लिपि में देश के नाम संदेश लिखा था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने संताली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किया था। इस भाषा की अपनी स्वतंत्र वैज्ञानिक और सर्वमान्य लिपि ओलचिकि लिपि है।

ओलचिकि में लिखे गये कई शिलापट्ट
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब झारखंड में डबल इंजन की सरकार थी, संताल बहुल रेलवे स्टेशनों का नामपट्ट ओलचिकि लिपि में लिखा गया था। संताल बहुल सभी दफ्तरों का नाम भी ओलचिकि लिपि में लिखा गया था। प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार भी संताली के ओलचिकि लिपि में दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के सभी विभागों की वेबसाइट संताली भाषा के लिए केवल ओलचिकि में उपलब्ध है। झारखंड, बंगाल, ओड़िशा ,छत्तीसगढ़, असम समेत कई राज्यों के साथ-साथ नेपाल और बांग्लादेश में भी ओलचिकी लिपि का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।

पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन ओलचिकि में
पूर्व सीएम रघुवर दास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से अपील की है कि NCERT और शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संस्थाओं में संताली भाषा की सभी पाठ्यपुस्तकों, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिका और डिजिटल संसाधनों का प्रकाशन-प्रसारण ओलचिकि लिपि में तैयार की जाए। रघुवर दास ने कहा कि इससे देश के करोड़ों संताली भाषी आबादी की समृद्ध भाषाई पहचान को संबल मिलेगा।