हजारीबाग:
हजारीबाग (Hazaribagh) शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रहे सफाई मित्रों (Safai Mitras) के भुगतान को लेकर हजारीबाग में गंभीर आरोप सामने आए हैं। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन (Door-to-Door Waste Collection) का काम संभाल रही GRC कंपनी पर सफाई वाहन चालकों ने तय राशि से कम भुगतान करने और वेतन में लगातार देरी का आरोप लगाया है। सफाई कर्मियों (Sanitation workers) का दावा है कि दस्तावेजों में उनका भुगतान करीब ₹18,400 दिखाया जाता है, जबकि उन्हें वास्तविक तौर पर करीब ₹13 हजार ही मिल रहे हैं। वहीं, कई बार दो से तीन महीने तक भुगतान (Salary Payment) नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है।
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20 साल का है GRC कंपनी के साथ अनुबंध
हजारीबाग नगर निगम ने शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था के लिए GRC कंपनी के साथ 20 वर्षों का अनुबंध किया है। इसी व्यवस्था के तहत सफाई वाहन चालक और अन्य सफाई कर्मी शहर में घर-घर से कचरा एकत्र करने का काम करते हैं। अब इन्हीं कर्मियों ने कंपनी की भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
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₹18,400 की जगह करीब ₹13 हजार मिलने का दावा
सफाई वाहन चालकों का आरोप है कि कागजों पर उनका भुगतान करीब ₹18,400 दर्शाया जाता है, लेकिन उन्हें करीब ₹13 हजार ही नगद और बैंक खाते के माध्यम से प्राप्त होते हैं। कर्मचारियों के मुताबिक निर्धारित राशि और उन्हें मिलने वाले वास्तविक भुगतान में ₹5 हजार से अधिक का अंतर है। मजदूरों का दावा है कि यह अंतर कथित तौर पर कमीशन के नाम पर काटा जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सफाई कर्मियों ने मांग की है कि दस्तावेजों में दर्ज भुगतान और उनके बैंक खातों में पहुंचने वाली वास्तविक राशि की जांच कराई जाए।
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2-3 महीने तक भुगतान में देरी का आरोप
सफाई कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कई बार लगातार दो से तीन महीने तक वेतन के लिए इंतजार करना पड़ता है। समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण सफाई कर्मियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। कर्मियों का कहना है कि नियमित काम करने के बावजूद अगर समय पर मजदूरी नहीं मिलेगी, तो उनके लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।
नगर आयुक्त से मिले मजदूर नेता
भुगतान से जुड़े इन आरोपों को लेकर मजदूर नेता विवेक वाल्मीकि सफाई मित्रों के साथ हजारीबाग नगर आयुक्त से मिले। उन्होंने सफाई कर्मियों की समस्याओं से नगर आयुक्त को अवगत कराया और तय मानकों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दस्तावेजों में सफाई वाहन चालकों का भुगतान ₹18,400 दर्ज है, तो उन्हें करीब ₹13 हजार ही क्यों मिल रहे हैं। इसके अलावा दो से तीन महीने तक भुगतान में देरी के आरोपों की भी जांच की जरूरत है। कागजों पर दर्ज भुगतान और कर्मियों को मिल रही वास्तविक राशि के बीच अंतर के आरोपों की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।