द फॉलोअप डेस्क
पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक पांच बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका में पदस्थापित 12 चिकित्सा पदाधिकारियों और एक एमटीएस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए विभागीय कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में कहा गया है कि मलेरिया नियंत्रण के लिए पर्याप्त चिकित्सा पदाधिकारी तैनात होने के बावजूद मरीजों की समुचित निगरानी और उपचार नहीं हो सका, जिसे कर्तव्य में लापरवाही और गंभीर उदासीनता माना गया है।

मौत के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट तलब
स्वास्थ्य विभाग ने जिन क्षेत्रों में बच्चों की मौत हुई है, वहां कार्यरत एएनएम, सीएचओ, सहिया और चिकित्सा पदाधिकारियों का पूरा विवरण 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि किन परिस्थितियों में बच्चों की मौत हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। नोटिस डॉ. विरेंद्र प्रसाद, डॉ. मेरी एस्टर किडो, डॉ. सत्य नारायण भगत, डॉ. विनिता लकड़ा, डॉ. आशा कृपा टूटी, डॉ. सुल्ताना परवीन, डॉ. चंदन कुमार मिश्रा, डॉ. आनंद कुमार सिंह, डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. प्रीति राय, डॉ. निशा और एमटीएस सुनील तिर्की सहित कुल 13 कर्मियों को जारी किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, निगरानी बढ़ाने के निर्देश
ब्रेन मलेरिया से लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पोटका क्षेत्र में निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि मरीजों की समय पर पहचान, जांच और इलाज सुनिश्चित करने के साथ-साथ रोकथाम के उपायों पर विशेष फोकस किया जा रहा है, ताकि संक्रमण पर जल्द नियंत्रण पाया जा सके।