गुमला:
घाघरा प्रखंड में डायन बिसाही जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक थाना प्रभारी की सकारात्मक पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। रविवार को थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह की पहल पर घाघरा प्रखंड मुख्यालय स्थित बस्ती में जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मुखिया योगेंद्र भगत समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। बैठक में थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह ने डायन बिसाही जैसी अमानवीय प्रथा पर चिंता जताते हुए समाज से इसे समाप्त करने की बात की। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे जागरूक समाज में डायन बिसाही जैसी कुप्रथाओं की कोई जगह नहीं है। ऐसे अंधविश्वास से समाज का नुकसान होता है। लोग हत्या, मारपीट और मानभंग जैसी जघन्य वारदातों को अंजाम दे बैठते हैं जो सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं है।

थाना प्रभारी ने रैश ड्राइविंग से बचने की सलाह दी
थाना प्रभारी ने रैश ड्राइविंग के बढ़ते मामलों पर भी चर्चा करते हुए लोगों से यातायात नियमों का पालन करने को कहा। अभिभावकों से आग्रह किया है कि अनावश्यक बच्चों को समय से पहले मोटरसाइकिल ना दे। शराब पीकर वाहन न चलाएं। इसके अलावा साइबर क्राइम से बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई तथा नशा मुक्ति के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।

जागरूकता ही अपराध रोकने का प्रभावी माध्यम
थाना प्रभारी ने कहा कि जागरूकता ही अपराध रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि पंचायत स्तर पर समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। कार्यक्रम में मुखिया योगेंद्र भगत की भी विशेष भागीदारी रही, जिन्होंने ग्रामीणों को सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। अंत में ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए समाज को सुरक्षित और जागरूक बनाने में सहयोग देने का संकल्प लिया।
लंबे समय तक पिछड़ेपन का शिकार रहा गुमला
गौरतलब है कि झारखंड का गुमला जिला लंबे समय तक अपनी भौगोलिक दुर्गमता और नक्सलवाद की वजह से पिछड़ा रहा है। बुनियादी संरचना के पहुंचने से विकास हुआ है लेकिन, पिछड़ेपन के चिन्ह अभी भी देखे जा सकते हैं। गाहे-बगाहे गुमला से भी डायन बिसाही जैसी अंधविश्वास प्रेरित घटनाएं सामने आती हैं। इस कुप्रथा से बचाने के लिए जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हालांकि, लोगों की शिकायत रहती है कि अक्सर इन कार्यक्रमों में खानापूर्ति की जाती है, लेकिन आज जब थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह खुद गांव वालों के बीच गए। उनसे संवाद स्थापित किया।
अंधविश्वास के नकारात्मक नतीजों के बारे में चर्चा की तो जागरूकता कार्यक्रम सार्थक लगा। थाना प्रभारी के इस मानवीय पहल की काफी तारीफ हो रही है।