द फॉलोअप डेस्क
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार हादसा इतना भीषण था कि मलबा लगभग एक किलोमीटर में बिखर गया। 23 फरवरी को रांची से उड़ान भरने के महज 17 मिनट बाद विमान चतरा जिले के सिमरिया स्थित करमाटांड़ जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें मरीज, दो परिजन, दो पायलट, डॉक्टर और नर्स शामिल थे।
प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह विमान रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का बीचक्राफ्ट किंग एयर सी90ए था, जो नॉन-शेड्यूल्ड एयर एंबुलेंस सेवा के तहत उड़ान भर रहा था। विमान ने उसी दिन दिल्ली से रांची तक की उड़ान भी भरी थी और तकनीकी लॉगबुक में कोई खराबी दर्ज नहीं की गई थी। रांची एयरपोर्ट पर विमान में 830 लीटर ईंधन भरा गया और फिर दिल्ली के लिए उड़ान भरी। खराब मौसम के कारण पायलट ने निर्धारित मार्ग की बजाय कोलकाता एटीसी से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी, जो मिल गई। इसके कुछ देर बाद ही एटीसी का संपर्क विमान से टूट गया।
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि हादसे में विमान का अगला हिस्सा (नोज) और कॉकपिट पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि फ्यूजलेज कई हिस्सों में टूट गया। दोनों पंखों के सिरे टूटकर अलग हो गए। पिछला हिस्सा (टेल/एम्पेनेज) 200 से 600 मीटर दूर बिखरा मिला। दोनों इंजन पंखों से अलग 250 और 640 मीटर दूर पाए गए। इसके अलावा, विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) सक्रिय नहीं हुआ। हालांकि, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में हादसे के असली कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
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