द फॉलोअप डेस्क:
राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर जारी गतिरोध खत्म हो गया है। स्क्रूटनी प्रक्रिया के दौरान पिछले 24 घंटे से जारी सस्पेंस खत्म हो गया। भारी विवाद और कांग्रेस पार्टी की आपत्तियों के बीच परिमल नाथवानी के नामांकन पर लगा होल्ड हटा लिया गया है। जानकारी के मुताबिक चुनाव अधिकारी ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को वैध करार दिया है। गौरतलब है कि नामांकन पत्र में प्रत्याशी के नाम सहित अन्य कथित त्रुटियों को लेकर परिमल नाथवानी का नामांकन होल्ड किया गया था।
इस बीच कांग्रेस पार्टी ने बुधवार (10 जून) को विधानसभा परिसर में परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। इसमें मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप समेत अन्य लोग शामिल हुए। कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर पर परिमल नाथवानी का फ्रेश नामांकन पत्र लेने का भी आरोप लगाया। हालांकि, सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए चुनाव अधिकारी ने परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को वैध करार दिया है।

विधानसभा परिसर में भाजपा-कांग्रेस में टकराव
गौरतलब है कि मंगलवार को ही यह खबर सामने आई थी कि परिमल नाथवानी का नामांकन पत्र होल्ड कर दिया गया है। उसमें नाम सहित कई अन्य बिंदुओं पर आपत्ति थी। मामला चुनाव अधिकारी के पास गया था। बुधवार सुबह से ही परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर गतिरोध शुरू हो गया था। कांग्रेस पार्टी के नेता विधानसभा परिसर में धरना प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने मांग की कि परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द किया जाए। कांग्रेस कोटे से हेमंत कैबिनेट में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के प्रति पक्षपाती है तो वहीं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग को अपने दफ्तर के बाहर भारतीय जनता पार्टी के नाम का नेमप्लेट लगा लेना चाहिए। विधानसभा परिसर में भी दोनों दलों के बीच गतिरोध दिखा।

कांग्रेस पार्टी ने लगाए कई गंभीर आरोप
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनाव अधिकारी के कमरे में गए, जबकि कांग्रेस के वरीय नेता सलमान खुर्शीद को भीतर नहीं जाने दिया गया। वहां, विधानसभा में तैनात मार्शल के साथ भी दीपिका पांडेय सिंह समेत अन्य कांग्रेस पार्टी के नेताओं की नोंक-झोक हुई। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने आरोपों को बेबुनियाद बताया।