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मातृत्व अवकाश के बदले 50 हजार की डिमांड, नहीं मिली छुट्टी; गर्भ में शिशु की मौत

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द फॉलोफप डेस्क
पलामू जिले में एक महिला शिक्षिका के प्रसव के दौरान पेट में ही नवजात की मौत हो जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षिका के पति का दावा है कि मातृत्व अवकाश स्वीकृत करने के एवज में 50 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई। उनका आरोप है कि समय पर अवकाश नहीं मिलने के कारण शिक्षिका की तबीयत बिगड़ती चली गई और अंततः प्रसव के दौरान यह दर्दनाक घटना हुई। हालांकि, पलामू के डीईओ संदीप कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।


10 दिनों तक अवकाश के लिए लगाती रहीं चक्कर
जानकारी के अनुसार, शिक्षिका भारती पांडेय तरहसी प्रखंड के सिलदिलीया प्लस टू हाई स्कूल में पदस्थापित हैं और वर्तमान में चैनपुर के कस्तूरबा विद्यालय में प्रतिनियुक्त थीं। प्रसव के लिए उन्होंने मातृत्व अवकाश का आवेदन दिया था, लेकिन आरोप है कि पिछले 10 दिनों से वह अवकाश स्वीकृत कराने के लिए शिक्षा विभाग के कार्यालय का चक्कर लगाती रहीं। शिक्षिका के पति और हजारीबाग जिला पुलिस बल में कार्यरत मुकेश कुमार तिवारी का आरोप है कि डीईओ कार्यालय के लिपिक अरुण गिरी और ईश्वर दयाल राम ने स्पष्ट रूप से कहा कि 50 हजार रुपये दिए बिना अवकाश स्वीकृत नहीं होगा। उन्होंने बताया कि कई बार डीईओ से मिलकर गुहार लगाई गई, शिक्षक नेताओं ने भी मामले को उठाया और पांच दिन पहले पलामू उपायुक्त से भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।


घटना के बाद व्हाट्सएप पर भेजा अवकाश आदेश
मुकेश कुमार तिवारी का आरोप है कि समय पर प्रसूति अवकाश नहीं मिलने के कारण उनकी पत्नी की हालत लगातार गंभीर होती गई और प्रसव के दौरान पेट में ही नवजात की मौत हो गई। उन्होंने डीईओ संदीप कुमार, लिपिक अरुण गिरी और ईश्वर दयाल राम के खिलाफ शहर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही है। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में अवकाश स्वीकृत कर उसका आदेश व्हाट्सएप पर भेज दिया। फिलहाल महिला शिक्षिका का इलाज मेदिनीनगर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।


डीईओ ने आरोपों से किया इनकार
इस मामले में पलामू के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संदीप कुमार ने कहा कि वह संबंधित महिला शिक्षिका को नहीं जानते हैं और उन्हें इस मामले की पहले कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने रिश्वत मांगने के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि शाम को शिक्षिका का मातृत्व अवकाश स्वीकृत कर दिया गया है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि परिजन दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Tags - Palamu Jharkhand Education Department Corruption Teacher